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HP High Court: दिहाड़ीदारों को नियमित करने की नीति पर राज्य सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, जानें पूरा मामला

Sun, 20 Jul 2025 01:34 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 20 Jul 2025 01:34 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर प्रदेश सरकार ने दिहाड़ीदार श्रमिकों को नियमित करने के लिए नीति लाई है। मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी। पढ़ें पूरी खबर...

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HP High Court notice to state government on the policy of regularizing daily wage workers
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल सरकार की ओर से दिहाड़ीदार श्रमिकों (डेली वेजर्स) को नियमित करने के लिए लाई गई नियमितीकरण नीति 2025 को लेकर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मुख्य सचिव को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने पाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर प्रदेश सरकार ने दिहाड़ीदार श्रमिकों को नियमित करने के लिए नीति लाई है। मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।

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हिमाचल सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को एक अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत 31 मार्च 2025 तक चार साल का दिहाड़ीदार के तौर पर कार्यकाल पूरा करने वाले श्रमिकों को नियमित करने का फैसला लिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि ये तथ्य ध्यान में रखने लायक है कि सुप्रीम कोर्ट ने सचिव कर्नाटक सरकार बनाम उमा देवी मामले में ये माना था कि नियमितीकरण नीति एक बार का उपाय है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वह अदालत को बताए कि उसने किस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है। रोगी कल्याण समिति के अस्थायी कर्मचारी के नियमितीकरण से जुड़ी अपील खंडपीठ के समक्ष दायर की है। 

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जब सरकार की नीति का बिंदु आया तो खंडपीठ ने इसे प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना पाया। इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने सूरजमणि केस में ये स्पष्ट किया था कि अदालत का फैसला समान नियमितीकरण से जुड़े समान तथ्यों पर आधारित मामलों में लागू होगा लेकिन, राज्य सरकार इस निर्णय के बाद डेली वेजर्स के रूप में कार्मिकों को नियोजित करने का सहारा नहीं लेगी, बल्कि सारी नियुक्तियां कानून के अनुसार करेगी। जबकि राज्य सरकार ने हर साल की तरह डेली वेजर्स के लिए 8 अप्रैल 2025 को नई नियमितीकरण नीति जारी कर दी।

औद्योगिक प्रोत्साहन योजना के आवेदनों पर चार महीने के भीतर लें निर्णय : हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने औद्योगिक प्रोत्साहन योजना के तहत केंद्र सरकार को विभिन्न औद्योगिक इकाइयों और होटलों के आवेदनों पर चार महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम अतुल शर्मा और इससे जुड़े कई अन्य सिविल रिट याचिकाओं और लेटर पेटेंट अपीलों (एलपीए) पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए हैं। यह मामला भारत सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए घोषित औद्योगिक विकास योजना के तहत प्रोत्साहन राशि के पंजीकरण और वितरण से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं में दावा किया था कि उनके आवेदन राज्य सरकार की ओर से सशक्त समिति को भेजे गए, लेकिन 9 नवंबर 2023 और 30 जुलाई 2024 के पत्रों के आधार पर उनके पंजीकरण को रद्द कर दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि केवल पंजीकृत इकाइयों को ही लाभ मिलेगा।
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मंडी-हमीरपुर राजमार्ग पर अतिक्रमण पर रिपोर्ट तलब
हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य राजमार्ग मंडी से हमीरपुर वाया रिवाल्सर, सकोडी चौक से जेल रोड तक लोगों की ओर से किए गए अतिक्रमण पर राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलाब की है। अदालत ने प्रदेश सरकार सहित नगर निगम मंडी को भी नोटिस जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी। न्यायालय को बताया गया कि अतिक्रमण के कारण मंडी शहर में गंभीर यातायात जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट में विपिन कुमार गुलेरिया ने जनहित याचिका दायर की है।

पुलिस महानिदेशक को बनाया पक्षकार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बाल अधिकार संरक्षण मामले में हिमाचल प्रदेश पुलिस महानिदेशक और अनुसूचित जाति अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कार्य निदेशालय को पक्षकार बनाया है। प्रदेश में जगह-जगह भीख मांगने वाले बच्चों को लेकर यह जनहित याचिका दायर की गई है। मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश भिक्षावृत्त निवारण अधिनियम 1979 की स्थिति पर भी एक हलफनामा दाखिल करने के भी आदेश दिए थे,जो राज्य में भिक्षावृत्ति को रोकने और इससे प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए बनाया गया है। 
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