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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Water Scam 7 engineers a contractor questioned in water scam mobile phones also confiscated

Himachal Water Scam: पानी घोटाले में 7 इंजीनियरों, एक ठेकेदार से पूछताछ, मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए; जानें

Tue, 07 Jan 2025 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 07 Jan 2025 02:00 AM IST
सार

बीते साल गर्मियों में टैंकर से पानी की आपूर्ति के नाम पर एक करोड़ से ज्यादा के घपले मामले में सोमवार को विजिलेंस ने अधिशासी अभियंता को छोड़कर अन्य 7 एसडीओ और जेई से पूछताछ की। करीब दो घंटे की पूछताछ में उन्होंने कई राज उगले हैं।
 

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Himachal Water Scam 7 engineers a contractor questioned in water scam mobile phones also confiscated
हिमाचल में पानी घोटाला। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जिला शिमला में बीते साल गर्मियों में टैंकर से पानी की आपूर्ति के नाम पर एक करोड़ से ज्यादा के घपले की विजिलेंस ब्यूरो ने तफ्तीश तेज कर दी है। कौन सा टैंकर किस समय कहां था, जीपीएस से इसका पता लगाया जाएगा। टैंकर चालक उस समय कहां थे, इसका भी मोबाइल लोकेशन से खुलासा होगा। साथ ही निलंबित इंजीनियरों और ठेकेदारों के बैंक खाते भी खंगाले जाएंगे। सोमवार को विजिलेंस ने अधिशासी अभियंता को छोड़कर अन्य 7 एसडीओ और जेई से पूछताछ की। करीब दो घंटे की पूछताछ में उन्होंने कई राज उगले हैं। एक ठेकेदार से भी पूछताछ हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों के मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए हैं। विजिलेंस ने जल शक्ति विभाग से रिकाॅर्ड जुटाया है। आज फिर इन इंजीनियरों से पूछताछ होगी।

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उधर, सोमवार को सुबह आठ बजे विजिलेंस ब्यूरो की टीम पानी के उन स्रोतों तक पहुंची, जहां से ठेकेदार ने पानी उठाने की बात कही है। सूत्रों के अनुसार इंजीनियर ही नहीं, कार्यालय के लिपिक भी जांच की जद में हैं। विजिलेंस ब्यूरो की टीम यह देख रही है कि बीते साल जल शक्ति विभाग ने पानी की आपूर्ति का टेंडर किया और इसमें कितने लोगों ने भाग लिया। कहीं चहेतों को लाभ देने के लिए सप्लाई ऑर्डर तो नहीं जारी हुआ है। विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने सोमवार को ठियोग से 20 किलोमीटर दूर गिरि नदी के लेलू पुल का दौरा किया। इसके अलावा टीम क्यार खड्ड भी पहुंची। जल शक्ति विभाग के रिकॉर्ड में बताया गया है कि गिरि नदी और क्यार खड्ड से टैंकरों के माध्यम से पानी प्रभावित क्षेत्रों में ले जाया गया। विजिलेंस हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है।
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यह भी आशंका जताई जा रही है कि यह घोटाला 1.13 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो सकता है। इस मामले की धीरे-धीरे परतें खुलेंगी। उधर, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री कह चुके हैं कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, अतिरिक्त मुख्य सचिव जल शक्ति ओंकार शर्मा ने कहा कि मामले की निष्पक्षता से जांच होगी।

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यह है मामला
बीते साल ठियोग तहसील के कई प्रभावित क्षेत्रों के लिए पानी की सप्लाई का टेंडर किया गया, लेकिन इसमें एक गांव ऐसा है, जो अभी तक सड़क से नहीं जुड़ा है। हैरत की बात है कि वहां भी टैंकर के जरिये पानी पहुंचाने की बात कही गई। जिन टैंकरों से पानी की सप्लाई देने का दावा किया गया, उनमें मोटरसाइकिल और एक अधिकारी की गाड़ी का नंबर भी दे दिया गया। जल शक्ति विभाग के इस कारनामों से हर कोई हैरत में है। ऐसे में सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल शक्ति विभाग के 10 इंजीनियरों को बीते दिनों सस्पेंड किया है।

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