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हिमाचल प्रदेश: बर्फबारी होने से तापमान में भारी गिरावट, पहाड़ों में बर्फ पिघलना लगभग बंद; गिरा बिजली उत्पादन

Tue, 06 Jan 2026 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू/मनाली।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू/मनाली। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 06 Jan 2026 05:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों में बर्फ पिघलना लगभग बंद हो गई है। जिसके कारण बिजली उत्पादन में भारी कमी दर्ज की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal snowmelt in mountains has almost stopped power generation decreases
लारजी डैम साइट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

ऊंची चोटियों पर बर्फबारी होने से तापमान में भारी गिरावट आ गई है। बारिश नहीं हो रही है। पहाड़ों में बर्फ पिघलना लगभग बंद हो गई है। इस वजह से नदी नालों का जल स्तर 70 से 80 प्रतिशत तक गिर गया है। परिणामस्वरूप बिजली उत्पादन में भारी कमी दर्ज की जा रही है। परियोजनाओं की टरबाइनें बंद हो गई हैं। मनाली की एलाइन दुहांगन जल विद्युत परियोजना के उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत कमी दर्ज की जा रही है। 192 मेगावाट की इस परियोजना में इन दिनों महज 20 मेगावाट उत्पादन हो रहा है।

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हिमाचल प्रदेश में अपर्याप्त बारिश से बिजली का उत्पादन गिर गया है। दिसंबर से ही बिजली परियोजनाओं में तय लक्ष्य से कम विद्युत उत्पादन हो रहा है। नदी-नालों में पानी की आवक कम होने से हाइडल प्रोजेक्टों को उनकी क्षमता के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पाया है। इससे प्रोजेक्टों में विद्युत उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ा है। ऊंची चोटियों पर बर्फबारी का दौर जारी है। इससे पहाड़ों पर पहले से जमी बर्फ का पिघलना बंद हो गया। इससे पर्वतमालाओं से बहने वाली नदियों व नालों में पानी की मात्रा सिकुड़ गई है।

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जिले की ऊझी घाटी के 24 मेगावाट के कंचनजंगा परियोजना में मात्र तीन मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। 126 मेगावाट की लारजी परियोजना में पानी की भारी कमी से तीन टरबाइनों में दो बंद हैं। एक टरबाइन को सुबह-शाम ही मात्र दो तीन घंटे के लिए ही चलाया जा रहा है। एलाइन दुहांगन परियोजना के परियोजना प्रभारी पंकज कपूर ने बताया कि परियोजना में इन दिनों लगभग पांच लाख यूनिट (20 मेगावाट) बिजली उत्पादन हो रहा है। जून-जुलाई के दौरान उत्पादन 192 मेगावाट के करीब पहुंच जाता है।

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सात माह से ठप पड़ी है 100 मेगावाट की सैंज परियोजना
हिमाचल प्रदेश पावर कोऑपरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) की 100 मेगावाट की सैंज परियोजना सात माह से ठप पड़ी है। उत्पादन न होने रोजाना 60 लाख रुपये का नुकसान प्रदेश सरकार को उठाना पड़ रहा है। जून में बरसात के दौरान जीवानाला में बादल फटने से एचपीपीसीएल का प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गया है। पावर हाउस में गाद भरने से उत्पादन प्रभावित हो गया है। एचपीपीसीएल अभी तक बिजली उत्पादन शुरू नहीं कर पाया है। परियोजना में बिजली उत्पादन ठप होने से अब तक एचपीपीसीएल को करोड़ों की क्षति हुई है। दूसरी ओर, प्रदेश सरकार को भी राजस्व का घाटा झेलना पड़ रहा है।
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