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Sanjauli Masjid: संजौली मस्जिद मामले में नया मोड़, तीन मंजिलों को गिराने के आदेश के खिलाफ एडीजे कोर्ट में अपील

Wed, 06 Nov 2024 07:34 PM IST
अंकेश डोगरा पीटीआई, शिमला
पीटीआई, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 06 Nov 2024 07:34 PM IST
सार

संजौली मस्जिद मामले में एक मुस्लिम संगठन ने मस्जिद की तीन अनाधिकृत मंजिलों को गिराने के नगर आयुक्त न्यायालय द्वारा 5 अक्टूबर को पारित आदेश को चुनौती दी। क्या है पूरा मामला पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Shimla Sanjauli Masjid Mosque Case Controversy
संजौली मस्जिद। फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विवादित संजौली मस्जिद मामले में बुधवार को नया मोड़ तब आया जब एक मुस्लिम संगठन ने शिमला की एक अदालत में अपील दायर कर मस्जिद की तीन अनाधिकृत मंजिलों को गिराने के नगर आयुक्त न्यायालय द्वारा 5 अक्टूबर को पारित आदेश को चुनौती दी। शिमला स्थित संजौली मस्जिद के अध्यक्ष लतीफ मोहम्मद और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों ने 12 सितंबर को मस्जिद की तीन अनाधिकृत मंजिलों को गिराने की पेशकश की थी और नगर आयुक्त (एमसी) से अनुमति मांगी थी।

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'एमसी कोर्ट द्वारा पारित आदेश तथ्यों के विपरीत'
नगर आयुक्त न्यायालय ने 5 अक्टूबर को अनाधिकृत मंजिलों को गिराने की अनुमति दी थी और इसे पूरा करने के लिए दो महीने का समय दिया था। मस्जिद समिति ने आदेशों का अनुपालन शुरू कर दिया था जिसके बाद छत को हटाने के साथ ही ध्वस्तीकरण का काम शुरू हो गया था। ऑल हिमाचल मुस्लिम संगठन (एएचएमओ), जिसने 11 अक्टूबर को एमसी न्यायालय द्वारा पारित ध्वस्तीकरण आदेश की समीक्षा की थी, ने शिमला के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत में आदेश को चुनौती दी। एएचएमओ के प्रवक्ता नजाकत अली हाशमी ने घोषणा की कि मस्जिद समिति और वक्फ बोर्ड के पास ऐसा कोई वचन देने का अधिकार नहीं है और एमसी कोर्ट द्वारा पारित आदेश तथ्यों के विपरीत हैं।

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'लतीफ किसकी ओर से एमसी कोर्ट में पेश हुआ'
एएचएमओ के वकील विश्व भूषण ने यहां संवाददाताओं से कहा, "हमने नगर आयुक्त न्यायालय के 5 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ अपील दायर की है और दलील दी है कि हम पीड़ित पक्ष हैं क्योंकि हमने संपत्ति दान की है। हम चुनौती दे रहे हैं कि लतीफ किसकी ओर से एमसी कोर्ट में पेश हुआ और उसे मस्जिद को गिराने की पेशकश करने के लिए किसने अधिकृत किया।" एएचएमओ ने दलील दी कि संजौली मस्जिद समिति पंजीकृत नहीं है और उसके द्वारा प्रस्तुत हलफनामा अवैध है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने आवेदन की स्थिरता और अन्य संबंधित मामलों पर निर्णय लेने के लिए अगली सुनवाई की तारीख 11 नवंबर तय की।

इससे पहले हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 21 अक्टूबर को शिमला नगर निगम आयुक्त को स्थानीय निवासियों द्वारा दायर याचिका पर आठ सप्ताह के भीतर 15 साल पुराने मामले का फैसला करने का आदेश दिया था और यह भी निर्देश दिया था कि मामले की सुनवाई से पहले सभी हितधारकों को नोटिस दिया जाए। स्थानीय नागरिकों के वकील जगत पाल ने कहा कि एएचएमओ के पास कोई अधिकार नहीं है और वह पीड़ित पक्ष नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत ने विध्वंस रोकने के संबंध में कोई आदेश पारित नहीं किया है और अपील की स्थिरता तय करने के लिए अगली सुनवाई 11 नवंबर को तय की है। उन्होंने कहा, "हम याचिकाकर्ता पर अधिकतम जुर्माना लगाने की दलील देंगे।"

पाल ने कहा कि स्थानीय निवासियों को पक्ष बनाया जाए या नहीं, यह प्रासंगिक नहीं है क्योंकि एमसी कोर्ट को मामले की सुनवाई से पहले सभी हितधारकों को नोटिस देने का निर्देश दिया गया था और आठ सप्ताह में मामले का फैसला करने का निर्देश दिया गया था। 11 सितंबर को एक मस्जिद के एक हिस्से को गिराने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 10 लोग घायल हो गए थे। संजौली विरोध प्रदर्शन के बाद, मंडी शहर में सरकारी भूमि पर एक मस्जिद द्वारा किए गए अतिक्रमण को ध्वस्त करने की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शनों पर मंडी में पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया।
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