Himachal News : सेवानिवृत बैंक अधिकारी से 80 लाख रुपये ठगे, तीन दिन रखा डिजिटल अरेस्ट; जानें विस्तार से
हिमाचल प्रदेश में एक सेवानिवृत बैंक अधिकारी को ठगों ने झांसे में लेकर 80 लाख रुपये की चपत लगा दी। अपराधियों ने बुजुर्ग (75) को तीन दिन तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान उन्हें बाहर किसी से संपर्क करने से मना किया गया। पढ़ें पूरी खबर...
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साइबर अपराधियों ने पुलिस अधिकारी बनकर शिमला के एक सेवानिवृत बैंक अधिकारी को झांसे में लेकर 80 लाख रुपये की चपत लगा दी। ठगों ने वीडियो कॉल के जरिये खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया और आधार कार्ड के दुरुपयोग का हवाला देकर उन्हें डराया-धमकाया। इतना ही नहीं, ठगों ने वीडियो कॉल पर कथित ऑनलाइन कोर्ट की कार्यवाही भी दिखाई और पीड़ित को विश्वास दिलाया कि वह गंभीर अपराध में फंसा हुआ है।
अपराधियों ने बुजुर्ग (75) को तीन दिन तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान उन्हें बाहर किसी से संपर्क करने से मना किया गया। ठगों ने कहा कि मामले की जांच और वेरिफिकेशन के लिए उन्हें अपने बैंक खाते से रुपये ट्रांसफर करने होंगे, जो प्रक्रिया पूरी होने के बाद वापस लौटा दिए जाएंगे। भरोसा जताकर पीड़ित से कुल 80 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। जब बुजुर्ग को कहा गया कि वह अपने लोकल थाने से रिपोर्ट ले, तब वह थाने पहुंचे। यहां पुलिस अधिकारियों ने पूरी कहानी सुनकर उन्हें बताया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। इस खुलासे के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत दर्ज करवाई। साइबर पुलिस ने आईपीसी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अपराधियों ने कॉल सेंटर जैसी सेटिंग से पूरी योजना को अंजाम दिया। पुलिस साइबर ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है और उन खातों का ब्योरा खंगाल रही है जिनमें रकम भेजी गई।
हिमाचल प्रदेश में साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट के नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों से ठगी कर रहे हैं। राज्य सीआईडी, साइबर क्राइम ने इसे गंभीर और तेजी से बढ़ता हुआ अपराध बताते हुए जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस के अनुसार जनवरी 2025 से अब तक प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी पांच एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें पीड़ितों से लगभग 2.42 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। पुलिस ने प्रदेश के लोगों को आगाह किया है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, सुरक्षित एप्लिकेशन ही डाउनलोड करें और ऑनलाइन खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें। ऐसी किसी भी घटना की तुरंत रिपोर्ट नजदीकी साइबर क्राइम थाने में दर्ज करवाएं।