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Himachal: एम्स बिलासपुर में 35 नई नियुक्तियों में से 9 विशेषज्ञों ने किया ज्वाइन, इन विभागों में देंगे सेवाएं

Fri, 04 Apr 2025 04:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 04 Apr 2025 04:00 AM IST
सार

एम्स बिलासपुर में अब तक 36 विभाग पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं और 720 बिस्तर की सुविधा शुरू हो गई है। वहीं. 9 विशेषज्ञों ने ज्वाइन कर लिया है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Out of 35 new appointments in AIIMS Bilaspur 9 specialists joined
एम्स बिलासपुर (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

एम्स बिलासपुर में 35 नए प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और एडिशनल प्रोफेसर नियुक्त किए गए हैं, जिनमें से 9 विशेषज्ञों ने ज्वाइन कर लिया है। इन विशेषज्ञों में एनेस्थीसिया, जनरल सर्जरी, मेडिसिन और अन्य विभागों के डॉक्टर शामिल हैं। अन्य फैकल्टी भी जल्द ज्वाइन करेगी। इससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

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एम्स बिलासपुर में अब तक 36 विभाग पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं और 720 बिस्तर की सुविधा शुरू हो गई है। हालांकि, संस्थान में अभी तक गैस्ट्रो विशेषज्ञ की ओपीडी शुरू नहीं हो पाई है। बार-बार विज्ञापन जारी करने के बावजूद इस पद को भरा नहीं जा सका है। इसका मुख्य कारण यह है कि गैस्ट्रो विशेषज्ञ के लिए निर्धारित क्राइटेरिया को पूरा करने वाले योग्य उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। लेकिन मेडिसिन विभाग में गैस्ट्रो के मरीजों की जांच की जा रही है। संस्थान में कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, आर्थोपेडिक्स, गायनी, मेडिसिन, पीडियाट्रिक, ईएनटी, एनेस्थीसिया, न्यूरोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, और न्यूरो सर्जरी, जनरल सर्जरी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी सहित कई बड़े विभाग पूरी तरह से कार्यरत हो चुके हैं। इन विभागों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।
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मार्च में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बिलासपुर दौरे के दौरान कहा था कि एम्स बिलासपुर में किसी भी पद को भरने के लिए तय मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भले ही इसमें समय लगे, लेकिन प्रदेश के लोगों को उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही नड्डा ने एम्स के कार्यकारी निदेशक को मरीजों का संपूर्ण रिकॉर्ड डिजिटल रखने का आदेश दिया था। इस डिजिटल रिकॉर्ड में यह दर्ज किया जाएगा कि कितने मरीज एम्स में आए, कितने स्वस्थ होकर लौटे और कितने किस बीमारी के साथ डिस्चार्ज किए गए। इससे मरीजों की बेहतर मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी।

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