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Himachal News: फर्जी सेंक्शन ऑर्डर मामले में अब निदेशक ने दर्ज करवाई एफआईआर, जानें पूरा मामला

Thu, 02 Oct 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 02 Oct 2025 05:00 AM IST
सार

ग्रामीण विकास विभाग में फर्जी सेंक्शन ऑर्डर जारी करने के मामले में निदेशक ने भी केस दर्ज करवाया है। वहीं, संबंधित विभाग से मामले से संबंधित दस्तावेज भी कब्जे में लिए जा रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Now the director has lodged an FIR in the fake sanction order case know the whole matter
एफआईआर दर्ज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ग्रामीण विकास विभाग में फर्जी सेंक्शन ऑर्डर जारी करने के मामले में एक और एफआईआर दर्ज हुई है। विभाग के निदेशक ने भी केस दर्ज करवाया है। इसमें अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी स्टांप का इस्तेमाल करके टेलीविजन की खरीद और धन की मंजूरी के लिए एक कंपनी के नाम पर कथित रूप से तीन पत्र जारी करने की बात सामने आई है। पुलिस ने इस संबंध में छानबीन शुरू कर दी है।

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संबंधित विभाग से मामले से संबंधित दस्तावेज भी कब्जे में लिए जा रहे हैं। इससे पहले ग्रामीण विकास निदेशालय में पूर्व डिप्टी सीईओ (एचपीएसआरएलएम) ने भी 68 लाख रुपये का फर्जी सेंक्शन ऑर्डर जारी करने के मामले में एफआईआर दर्ज करवाई है। पुलिस को दी शिकायत में विभाग के निदेशक राघव शर्मा ने बताया कि 27 सितंबर को उन्हें पंचायतीराज मंत्री से सूचना मिली कि निजी कंपनी के प्रतिनिधि ने ग्रामीण विकास और पंचायतीराज विभाग से टेलीविजन की खरीद और धन की मंजूरी के लिए कथित रूप से जारी किए गए तीन पत्र प्रस्तुत किए हैं। इसको लेकर उन्होंने मामले की अपने स्तर जांच करवाई तो पता चला कि विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है यानि विभाग की ओर से ऐसा कोई सेंक्शन ऑर्डर कभी जारी ही नहीं किया गया।
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इससे साफ है कि जाली मोहरों और हस्ताक्षर से इन दस्तावेजों को तैयार किया गया है। विभाग में इस तरह की खरीद के लिए कोई अनुमोदन नहीं है और जाली कागज में दिखाए गए अनुसार विभाग से कोई भुगतान जारी नहीं किया गया है। पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 318(4), 336 (3) और 340(2) के तहत केस दर्जकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
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विभाग के कर्मचारियों और अफसरों को पूछताछ के लिए तलब करेगी पुलिस
ग्रामीण विकास और पंचायतीराज विभाग में लाखों के सेंक्शन ऑर्डर तैयार करने के मामले में विभाग के कई अफसर और अधिकारी जांच की जद में आ गए हैं। पुलिस अभी मामले से जुड़े दस्तावेजों को विभाग से कब्जे में ले रही है। इसके बाद शक के दायरे में आए कर्मचारियों और अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। इनसे पूछताछ के बाद ही खुलासा होगा कि निजी कंपनी को फर्जी सेंक्शन ऑर्डर जारी करने के पीछे किसका हाथ है और इस पूरे गड़बड़झाले को अंजाम देने के पीछे किसका क्या फायदा था।
 
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