Himachal News: छोटी काशी में 150 करोड़ से शिवधाम का होगा सौंदर्यीकरण, देश का दूसरा सबसे ऊंचा शिवलिंग बनेगा
अब दो साल बाद शिवधाम के पहले चरण का काम भी शुरू होने वाला है। इसको लेकर पर्यटन निगम ने शनिवार को 29 करोड़ के प्रोजेक्ट का नए सिरे से टेंडर किया। मंडी के शिवधाम में 108 फीट ऊंचा शिवलिंग बनेगा।
विस्तार
छोटी काशी मंडी में 150 करोड़ रुपये से एशियन विकास बैंक (एडीबी) शिवधाम का सौंदर्यीकरण करेगा। ड्रीम प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का काम एडीबी को सौंपा है। इस पैसे से अधोसंरचना का विकास होगा। चरण एक पूरा होने के बाद दूसरे का टेंडर होगा। इस परियोजना का निर्माण साढ़े नौ हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है। दूसरे चरण में 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियों का सौंदर्यीकरण, शिवस्मृति म्यूजियम, ओरिएंटेशन सेंटर, हर्बल गार्डन, नक्षत्र वाटिका, एमफी थियेटर का निर्माण होगा। इसके साथ में मानसरोवर कुंड, मोक्ष पथ, बिल्वपत्र कुंड तथा वाटर पार्क परिसर (फाउंटेन), लाइट एंड साउंड, रेस्टोरेंट, ज्योतिर्लिंगों को जोड़ने वाली सड़कें, सैकड़ों गाड़ियों के लिए पार्किंग की सुविधाएं विकसित की जाएगी।
अब दो साल बाद शिवधाम के पहले चरण का काम भी शुरू होने वाला है। इसको लेकर पर्यटन निगम ने शनिवार को 29 करोड़ के प्रोजेक्ट का नए सिरे से टेंडर किया। इसमें तीन लोगों ने टेंडर भरे हैं। पर्यटन विकास निगम के प्रबंध राजीव कुमार ने बताया कि टेंडर इसी हफ्ते आवंटित किए जाएंगे। निर्माण कंपनी को शिवधाम के बचे 70 फीसदी काम को डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य दिया जाएगा।
देश का दूसरा सबसे ऊंचा शिवलिंग बनेगा
देश में सबसे ऊंचा शिवलिंग केरल के तिरुवनंतपुरुम में माहेश्वरम श्रीशिवा पार्वती मंदिर में है। इसकी ऊंचाई 111.2 फीट है। इससे कम 108 फीट का शिवलिंग भूतेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ में है। मंडी के शिवधाम में 108 फीट ऊंचा शिवलिंग बनेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से मंडी देश-दुनिया की धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन मानचित्र पर उभरेगा।
27 फरवरी, 2021 को रखी थी आधारशिला
प्रोजेक्ट के पहले चरण का काम हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) करवा रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 27 फरवरी, 2021 को कंगनीधार (मंडी) में शिवधाम ड्रीम प्रोजेक्ट शिलान्यास किया था। एचपीटीडीसी ने पहले चरण के करीब 50.22 करोड़ के शिवधाम प्रोजेक्ट का काम महाराष्ट्र की कंपनी को दिया था। इसके बाद एक साल में यहां पांच ज्योतिर्लिंगों का आधारभूत ढांचा तैयार किया गया। इसके अलावा सात ज्योतिर्लिंग के मंदिरों के भवनों का 30 फीसदी काम किया गया। साल 2022 में निर्माणाधीन कंपनी के खिलाफ अनियमितताएं पाई गईं। तब से निर्माण पर रोक लगी है।