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Himachal: राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड रजिस्टर से छेड़छाड़, गंभीर अनियमितताओं का संदेह, जानें मामला
Wed, 04 Jun 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 04 Jun 2025 05:00 AM IST
सार
एनएलयू से जुड़े एक स्थायी सफाई कर्मचारी को सेवा से हटाने के मामले में फैसले को हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा है। अदालत मेंं राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार उपस्थित हुए। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) से जुड़े एक स्थायी सफाई कर्मचारी को सेवा से हटाने के मामले में फैसले को सुरक्षित रखा है। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ के आदेशों के बाद विश्वविद्यालय ने इस संबंध में रिकॉर्ड प्रस्तुत किया। रिकॉर्ड की जांच करने के बाद एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि रिकॉर्ड रजिस्टर से छेड़छाड़ की गई है।
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अदालत ने पाया कि एनएलयू ने जो रिकॉर्ड प्रस्तुत किया है, उसमें पांच ढीली नोटिंग शीट या पृष्ठ भी शामिल हैं। यह स्पष्ट रूप से दिख रहा था कि पृष्ठ संख्या 1 को बाद में ढीली नोटिंग शीट में जोड़ा गया था। इसके परिणामस्वरूप मूल पृष्ठ संख्या 1 को हस्तलिखित रूप से 2 में बदल दिया गया था। इसी तरह मूल पृष्ठ संख्या 2 को बदलकर 3 और 3 को बदलकर 4 और 4 को बदलकर 5 कर दिया गया है। ऐसे में गंभीर अनियमितताओं का संदेह है। अदालत ने इसके बाद मूल रिकॉर्ड को रजिस्ट्रार (न्यायिक) की हिरासत में रखा गया है।
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अदालत मेंं राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि पृष्ठ संख्या 1 के रूप में गिना जाने वाला पृष्ठ पहले से ही मौजूद था और फाइल में ढीला पड़ा था। उन्होंने अपनी समझ के अनुसार इस पृष्ठ को ढीली नोटिंग शीट के साथ जोड़ा और इसे संख्या 1 के रूप में क्रमांकित किया और परिणामस्वरूप पिछली आदेश में दर्ज ढीली शीटों की नंबरिंग बदल दी। कहा कि उन्होंने यह सब बिना किसी दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया था।
वहीं, प्रतिवादी विश्वविद्यालय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि इस मामले में विश्वविद्यालय ने स्वतः ही संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि केवल इस मामले से संबंधित फाइल ही नहीं, बल्कि कई अन्य आधिकारिक फाइलों में भी ढीली शीट/दस्तावेज बिना उचित पेजिंग के हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले पर अब फैसला सुरक्षित रख लिया गया है।
यह है मामला
याचिकाकर्ता की एनएलयू में वर्ष 2022 में सफाई कर्मचारी के तौर पर स्थायी आधार पर नियुक्ति की गई। याचिकाकर्ता की सेवाओं को प्रतिवादी विश्वविद्यालय ने बिना नोटिस दिए वर्ष 2023 में हटा दिया। याचिकाकर्ता ने सेवाओं से हटाने जाने के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता की एनएलयू में वर्ष 2022 में सफाई कर्मचारी के तौर पर स्थायी आधार पर नियुक्ति की गई। याचिकाकर्ता की सेवाओं को प्रतिवादी विश्वविद्यालय ने बिना नोटिस दिए वर्ष 2023 में हटा दिया। याचिकाकर्ता ने सेवाओं से हटाने जाने के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी है।