कब होगी बारिश? हिमाचल प्रदेश में सूखे की मार, गेहूं की 20% फसल मुरझाई; बर्बाद हो जाएगी किसानों की मेहनत
हिमाचल प्रदेश में बारिश न होने से सूखे जैसी स्थिति बन चुकी है। बारिश और बर्फबारी न होने से किसान भी परेशान हैं और बागवान भी। पढ़ें पूरी खबर...
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औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के पहाड़ी इलाकों में सूखे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण गेहूं की फसल 15 से 20 फीसदी तक खराब हो चुकी है। यदि अगले कुछ दिनों में इंद्रदेव मेहरबान नहीं हुए, तो यह नुकसान और अधिक बढ़ सकता है।
बता दें कि बीबीएन क्षेत्र की करीब 7,000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की गई है। क्षेत्र के मैदानी इलाकों में तो सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन रामशहर, कुठाड़ और चंडी जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। इस वर्ष नवंबर तक खेतों में अच्छी नमी होने के कारण किसानों ने समय पर बिजाई कर दी थी और फसल उगनी भी शुरू हो गई थी, लेकिन पिछले एक माह से सूखा पड़ने के कारण अब फसल के किनारे मुरझाने लगे हैं।
नालागढ़ के कुंडलू, रामशहर, जयनगर, लोहारघाट, दिग्गल और बद्दी के कुठाड़, पट्टा, चंडी, कोटबेजा, दाड़वा व भावगुड़ी पंचायतों के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों संजीव ठाकुर और कृष्णा शर्मा का कहना है कि यदि एक-दो दिन में बारिश नहीं हुई तो रही-सही उम्मीद भी खत्म हो जाएगी।
औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) इन दिनों धुंध और कड़ाके की सूखी ठंड की चपेट में है। आलम यह है कि सुबह और शाम के समय पूरा क्षेत्र धुंध की सफेद चादर में लिपट जाता है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जहां पहाड़ी इलाकों में सुबह से ही खिली धूप राहत दे रही है, वहीं मैदानी औद्योगिक बेल्ट में सूरज के दर्शन सुबह 10 बजे के बाद ही हो पा रहे हैं। धुंध का सबसे ज्यादा असर उद्योगों में काम करने वाले कामगारों पर पड़ रहा है।
सुबह ड्यूटी जाते समय और शाम को 6 बजे के बाद वापस लौटते वक्त कामगारों को घनी धुंध और ठिठुरन का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और कामगारों का कहना है कि लंबे समय से बारिश न होने के कारण सूखी ठंड जानलेवा साबित हो रही है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। सूखी ठंड और प्रदूषण मिश्रित धुंध के कारण क्षेत्र में सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बद्दी अस्पताल के बीएमओ डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि अस्पताल में रोजाना 200 से 250 की ओपीडी हो रही है, जिसमें से करीब 40 से 50 मरीज केवल सर्दी, जुकाम और खांसी के पहुंच रहे हैं।