हिमाचल: पीटीए शिक्षक को ग्रांट इन एड से इन्कार नहीं कर सकती सरकार, हाईकोर्ट ने भुगतान के दिए आदेश
प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूल में 16 साल तक सेवा लेने के बाद राज्य सरकार शिक्षक को वित्तीय लाभों (ग्रांट इन एड) से इन्कार नहीं कर सकती है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्कूल में 16 साल तक सेवा लेने के बाद राज्य सरकार शिक्षक को वित्तीय लाभों (ग्रांट इन एड) से इन्कार नहीं कर सकती है। अदालत ने याचिकाकर्ता को पीटीए ग्रांट-इन-एड नियमों के तहत मानदेय और पिछले सभी बकाये (एरियर) का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। विभाग ने इतने साल तक कोई आपत्ति नहीं जताई, जो कानूनन विभाग की मौन सहमति को दर्शाता है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर रिट याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। अदालत ने शिक्षा विभाग की ओर से याचिकाकर्ता की मांग को खारिज करने वाले 28 मई 2022 के उस आदेश को भी पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिसमें ग्रांट इन एड को देने से इन्कार कर दिया था।
अदालत ने कहा कि यह एक बेहद अजीब स्थिति है, जहां पीटीए या एसएमसी की ओर से लोगों को बच्चों को पढ़ाने के लिए बुला लिया जाता है, लेकिन जब वे मानदेय या बराबरी की मांग करते हैं, तो विभाग उनकी नियुक्ति के तरीके पर सवाल उठाने लगता है। राज्य सरकार को इस तरह शिक्षकों को उनके हक से वंचित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता अपनी नियुक्ति की तारीख से ही ग्रांट-इन-एड नियमों के तहत मानदेय पाने की हकदार है। साथ ही भविष्य में भी उन्हें पीटीए नीति के तहत नियमित रूप से मानदेय का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
कोर्ट ने साफ किया कि इस आदेश को याचिकाकर्ता की नियुक्ति को स्थायी या वैध मानने का आधार न समझा जाए, यह राहत केवल उनके द्वारा दी गई सेवाओं के बदले मानदेय देने के लिए है।याचिकाकर्ता को वर्ष 2010 में कांगड़ा जिले में पीटीए की ओर से ड्राइंग मास्टर के रूप में नियुक्त किया गया था। जब उन्होंने नियमों के तहत मानदेय (ग्रांट-इन-एड) की मांग की, तो शिक्षा विभाग ने यह कहकर उनका दावा खारिज कर दिया कि उनकी नियुक्ति स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी)/पीटीए द्वारा उस समय की गई थी, जब समिति के पास शिक्षक नियुक्त करने का कोई कानूनी अधिकार या सरकारी मंजूरी नहीं थी। हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता की नियुक्ति कानूनन गलत थी, तो किसी ने उसे विभाग में काम करने से क्यों नहीं रोका गया। विभाग यह बहाना नहीं बना सकता कि उसे सरकारी स्कूल में चल रही इस नियुक्ति की जानकारी नहीं थी।