हिमाचल प्रदेश: पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज, एनएचएआई अधिकारी के साथ बदसलूकी का आरोप
Minister Anirudh Singh : हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ मारपीट और मौखिक दुर्व्यवहार के आरोपों के चलते एफआईआर दर्ज की गई है। पढ़ें पूरी खबर...
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एनएचएआई के अधिकारियों के साथ मारपीट के मामले में पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह समेत अन्य के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। एनएचएआई शिमला के प्रबंधक अचल जिंदल की शिकायत पर ढली पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। सोमवार दोपहर को भट्ठाकुफर की माठू कॉलोनी में बहुमंजिला भवन के जमींदोज होने के बाद पंचायती राज मंत्री प्रशासन के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि मंत्री समेत कुछ लोग एनएचएआई के अधिकारियों को कमरे में ले गए और मारपीट करने लगे। दोनों अधिकारी लहूलुहान मौके से जान बचाकर भागे और खुद अपनी गाड़ी से आईजीएमसी अस्पताल उपचार करवाने के लिए पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मारपीट का आरोप है। वहीं, केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को चिट्ठी लिखकर घटना को निंदनीय बताते हुए तत्काल कार्रवाई करने और अधिकारियों को सुरक्षा देने को कहा है।
सीएम सुक्खू से बातचीत करने की जानकारी गडकरी ने खुद एक्स पर पोस्ट डालकर दी। वहीं, गडकरी ने मुख्यमंत्री सुक्खू को भी इस संबंध में एक चिट्ठी लिखी है। गडकरी ने सीएम को पत्र में इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने की बात करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार इसमें गंभीरता नहीं बरती गई वर्तमान में चल रही और भविष्य की योजनाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए तत्पर होना पड़ेगा।
गडकरी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज मंत्री और उनके सहयोगियों की ओर से एनएचएआई पीआईयू शिमला के प्रबंधक अचल जिंदल पर किया गया क्रूर हमला अत्यंत निंदनीय है और कानून के शासन का अपमान है। अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन कर रहे एक लोक सेवक पर इस तरह का क्रूर हमला न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि संस्थागत अखंडता को भी नष्ट करता है। गडकरी ने लिखा कि उन्होंने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बात की है। उन्होंने सभी दोषियों के खिलाफ तत्काल और अनुकरणीय कार्रवाई करने का आग्रह किया है। जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए और बिना देरी के न्याय मिलना चाहिए।
वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मेरी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बात हुई है। हमने कहा है कि कानून के दायरे के मुताबिक जो कार्रवाई होगी वो करेंगे।The heinous assault on Shri Achal Jindal, Manager, NHAI PIU Shimla, allegedly by the Minister of Panchayati Raj, Himachal Pradesh, and his associates, is deeply reprehensible and an affront to the rule of law. Such a brutal attack on a public servant performing his official…
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) July 1, 2025
एनएचएआई के प्रबंधक अचल जिंदल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 30 जून को उप मंडलाधिकारी शिमला ग्रामीण ने उन्हें अपने कार्यालय में सुबह 11:30 बजे बैठक के लिए बुलाया। वह और साइट इंजीनियर योगेश वर्मा दोनों जब एसडीएम ग्रामीण कार्यालय में पहुंचे तो वह वहां मौजूद नहीं थे। उन्हें भट्ठाकुफर आने के लिए कहा गया। जब दोनों मौके पर पहुंचे तो एसडीएम ग्रामीण के साथ मंत्री अनिरुद्ध सिंह और कुछ लोग मौजूद थे।
जिंदल ने पुलिस को बयान दिया कि इस दौरान मंत्री को बहुमंजिला भवन गिरने के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद दोनों अधिकारियों को समीप के ही एक निजी व्यक्ति के कमरे में बुलाया। आरोप है कि लोगों की मौजूदगी में मारपीट शुरू की गई। इस दौरान पानी का घड़ा अधिकारी के सिर पर मारा गया, जिससे खून बहने लगा। जब साइट इंजीनियर ने उन्हें बचाने का प्रयास किया तो मारपीट की गई। इसमें दोनों को गंभीर चोटें आईं। मारपीट के दौरान मौजूद रहे एसडीएम ग्रामीण ने भी किसी तरह की मदद नहीं की। इसके बाद दोनों जान बचाकर मौके से भागे और अपनी गाड़ी से आईजीएमसी पहुंचे। पुलिस ने मेडिकल के बाद पंचायती राज मंत्री समेत अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा, 132, 121(1), 352, 126(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसएसपी शिमला संजीव गांधी ने मामले पर किसी टिप्पणी से इन्कार किया है।
मुख्य सचिव ने दिया जवाब, एफआईआर दर्ज की जा चुकी, जांच जारी
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को पत्र लिखा कि इस तरह घटना न केवल राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि फील्ड स्तर पर काम कर रहे एनएचएआई के अधिकारियों के मनोबल को भी प्रभावित करती है। मामले की विस्तृत जांच करवाई जाए और जिम्मेदार सभी लोगों पर कानून के अनुसार मुकदमा चलाया जाए। अन्यथा इससे हिमाचल में काम कर रहे एनएचएआई अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ेगा, जिसका असर राज्य में परियोजनाओं पर पड़ेगा। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने जवाब दिया कि पहले ही मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। मामले की जांच की जा रही है।
भट्ठाकुफर की माठू काॅलोनी में बहुमंजिला भवन गिरने के बाद मौके पर गया था। इस दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। जब दोनों एनएचएआई के अधिकारी निकले तो पता चला कि इस तरह की घटना हुई है। जिस जगह पर मारपीट हुई वहां पर मैं मौजूद नहीं था- मंजीत शर्मा, एसडीएम ग्रामीण, शिमला
जयराम ठाकुर बोले- मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करें
वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की प्रदेश के एक मंत्री प्रशासन और पुलिस की उपस्थिति में मारपीट अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय कृत्य है। दो एनएचएआई के अधिकरियों को पुलिस प्रशासन और मंत्री की उपस्थिति में बुलाया गया। मीडिया के लोगों को धमकी देकर उनसे उनके कैमरे बंद करवाए गए और इसके बाद कमरे में बंदकर उनसे मारपीट की गई। इसके बाद मंत्री के समर्थकों द्वारा उन्हें कमरे के बाहर भी उन्हें मारा पीटा गया। उनके ऊपर गमले फेंके गए। मारपीट में दोनों अधिकारी लहूलुहान हो गए। उन दोनों अधिकारियों ने मीडिया के सहयोग से किसी तरीके से भाग कर अपनी जान बचाई। अब वे आईजीएमसी में एडमिट हैं। उनका उपचार चल रहा है। मीडिया के लोगों द्वारा बीच बचाव किए जाने की वजह से उनकी जान बची। सबसे शर्मनाक बात यह है कि मौके पर एसडीएम और पुलिस की मौजूदगी के बाद भी उनके बीच बचाव करना तो दूर उन्हें प्रशासन और पुलिस द्वारा अस्पताल भी नहीं पहुंचाया गया। एनएचएआई के अधिकारियों पर यह हमला अत्यंत घटिया और कानून व्यवस्था का पतन का उदाहरण है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था अपने हाथ में लेने वाले मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करें और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें। प्रदेश में इस तरीके की अराजकता को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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