Himachal Election: स्थानीय निवासी बोले- जनप्रतिनिधि करते हैं उपेक्षा, महंगाई-बेरोजगारी से त्रस्त है आम आदमी
Himachal Election: हिमाचल प्रदेश के कसौली विधानसभा क्षेत्र के निवासी प्यार चंद्र का कहना है कि रोजगार अहम मुद्दा है, वहीं निजी क्षेत्र में रोजगार नहीं हैं। साढ़े दस हजार रुपये में गुजारा नहीं होता है। सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की बहुत जरुरत है...
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हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। जहां हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा हावी है, वहीं आम जनता बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से परेशान है। लोगों का कहना है कि उन्हें सरकारी नौकरियां नहीं मिल रही हैं, वहीं निजी क्षेत्र में कम सेलरी मिल रही है। वहीं लोगों की यह भी शिकायत है कि जन प्रतिनिधि उनकी समस्याओं के प्रति आंखें मूंद कर बैठे रहते हैं।
हिमाचल प्रदेश के कसौली विधानसभा क्षेत्र के निवासी प्यार चंद्र का कहना है कि रोजगार अहम मुद्दा है, वहीं निजी क्षेत्र में रोजगार नहीं हैं। साढ़े दस हजार रुपये में गुजारा नहीं होता है। सरकारी क्षेत्र में नौकरियों की बहुत जरुरत है। वहीं अन्य निवासी हुकुम चंद ने बताया कि महंगाई अधिक है। बदलाव जरुरी है। नौकरी तो प्राइवेट क्षेत्र में ही मिल रही है। साथ ही वे पुरानी पेंशन लागू करने के पक्षधर हैं। आम आदमी पार्टी के बारे में पूछने पर राजबीर बोलते हैं कि यहां तो आम आदमी पार्टी का जोर नहीं है। उनकी अभी शुरुआत है। अगले चुनाव तक इंतजार करना होगा। यहां केवल भाजपा और कांग्रेस, चुनाव मैदान में है। वह कहते हैं कि वीरभद्र सिंह की अनुपस्थिति लोगों को खल रही है। भाजपा का तो केवल प्रचार में पलड़ा भारी है, सेंटर में मोदी जी बैठे हैं तो इसलिए प्रचार ज्यादा हो रहा है।
वहीं धर्मपुर विधानसभा में शिव चरण दास का कहना है कि यहां इस बार भी चुनाव मोदी के नाम पर लड़ा जा रहा है। ईडब्ल्यूएस आरक्षण का फायदा भाजपा सरकार को मिलेगा। वहीं उनकी शिकायत राज्य के निवर्तमान स्वास्थ्य मंत्री और इलाके के विधायक से भी है। उनका कहना है कि उन्होंने कुछ काम नहीं किया है। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है।
जनप्रतिनिधियों से शिकायत कुमारहट्टी के लोगों की भी है। वहां के लोगों का कहना है कि सरकार ने बहुत अनदेखी की है। काम की तरफ बहुत ध्यान नहीं दिया है। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्री केवल मंत्री ही बने रहे, स्थानीय लोगों के लिए कुछ भी नहीं किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे भोजनगर में 10 बेड का एक अस्पताल बनवाना चाहते थे, क्योंकि वहां पर स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। लेकिन स्वास्थ्य मंत्री ने उनकी इस मांग को अनसुनाकर दिया।