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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Bilaspur Country's first cable ferry will start from Bhakra to Talai in Gobind Sagar

हिमाचल प्रदेश: गोबिंद सागर में भाखड़ा से तलाई तक शुरू होगी देश की पहली केबल फेरी, 20 करोड़ होंगे खर्च; जानें

Wed, 23 Jul 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 23 Jul 2025 05:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के जिला बिलासपुर में देश की पहली 2 किलोमीटर लंबी केबल फेरी शुरू होगी। वर्तमान में इस रूट पर श्रद्धालुओं को लगभग 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, लेकिन केबल फेरी के शुरू होते ही यह दूरी कुछ ही मिनटों की रह जाएगी। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Bilaspur Country's first cable ferry will start from Bhakra to Talai in Gobind Sagar
गोबिंद सागर झील पर शाहतलाई का ब्राह्मणीघाट। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

गोबिंद सागर झील में भाखड़ा बोट घाट से शाहतलाई के ब्राह्मणी घाट तक देश की पहली 2 किलोमीटर लंबी केबल फेरी शुरू होगी। यह जल परिवहन परियोजना न केवल तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को बड़ी राहत प्रदान करेगी बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति देगी। इस अत्याधुनिक फेरी का उद्देश्य धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों को जोड़ने के साथ-साथ रोजगार को भी बढ़ावा देना है। खास बात यह है कि उत्तर भारत ही नहीं बल्कि देश में कहीं भी इस तरह की फेरी सुविधा नहीं है।

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यह जलमार्ग नयनादेवी से बाबा बालक नाथ मंदिर, दियोटसिद्ध तक जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बना देगा। वर्तमान में इस रूट पर श्रद्धालुओं को लगभग 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, लेकिन केबल फेरी के शुरू होते ही यह दूरी कुछ ही मिनटों की रह जाएगी। इस फेरी में न केवल यात्री, बल्कि कार, जीप, बाइक और स्कूटर जैसे छोटे वाहन भी एक किनारे से दूसरे किनारे आसानी ले जा सकेंगे। फेरी को केबल के सहारे खींचा जाएगा, जिसका कुछ हिस्सा पानी पर तैरेगा और कुछ हिस्सा केबल पर संतुलित रहेगा।

इस तकनीक से संचालन में ईंधन की जरूरत नहीं होगी, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा। परियोजना की कुल लागत करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इससे पहले श्री नयना देवी आने वाले श्रद्धालु माथा टेककर यहीं से वापस चले जाते थे, लेकिन केबल फेरी शुरू होने के बाद उनका बाबा बालक नाथ, दियोट सिद्ध जाना आसान हो जाएगा। इससे जहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं स्थानीय रोजगार से साधन भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों और तकनीकी टीम की ओर से 28 लाख से डीपीआर तैयार की जा रही है। 

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कोटधार, बच्छरेटु किला और प्राचीन मंदिर भी जुड़ेंगे पर्यटन सर्किट से
केबल फेरी शुरू होने से कोटधार की केसरिया पंचायत का क्षेत्र भी सीधे पर्यटन सर्किट से जुड़ जाएगा। यह क्षेत्र अब तक सड़क मार्ग से काफी हद तक कटा हुआ है, लेकिन केबल फेरी के जरिए यहां तक पहुंचना आसान हो जाएगा। ऐतिहासिक बच्छरेटु किला और प्राचीन शिव मंदिर को भी पर्यटन मार्ग पर लाने की तैयारी की जा रही है। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।
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यह है केबल फेरी
केबल फेरी एक प्रकार की नाव होती है, जिसे एक मजबूत केबल या रस्सी के जरिए एक किनारे से दूसरे किनारे तक खींचा जाता है। यह केबल पानी के ऊपर या नीचे लगी होती है। भारत में यह तकनीक कम ही जगहों पर देखने को मिलती है। जहां है भी, वहां अधिकतर फेरी ईंधन से चलती है, लेकिन भाखड़ा में प्रस्तावित फेरी पूरी तरह केबल आधारित होगी, जो इसे पर्यावरण के लिहाज से भी खास बनाएगी।

यह परियोजना बिलासपुर जिले में पर्यटन और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गोबिंद सागर झील, ऐतिहासिक धरोहरों और तीर्थ स्थलों के संगम से क्षेत्र का पर्यटन नक्शा बदल सकता है। -राजेश धर्माणी, तकनीकी शिक्षा मंत्री, हिमाचल सरकार
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