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हिमाचल प्रदेश: 45 साल बाद लौटी याददाश्त, मुंबई से सिरमौर पहुंचा रिखी राम; हरियाणा में 1980 में हुआ था हादसा

Wed, 19 Nov 2025 08:20 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, पांवटा साहिब (सिरमौर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, पांवटा साहिब (सिरमौर)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 19 Nov 2025 08:20 PM IST
सार

सिरमौर के नाड़ी गांव निवासी रिखी राम करीब 45 साल के बाद घर लौट आए। रिखी राम वर्ष 1980 में महज 16 साल की उम्र में लापता हो गए थे। जानें पूरा मामला...

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Himachal After 45 years Rikhi Ram returns to Sirmaur from Mumbai accident occurred in Haryana in 1980
45 वर्षों के बाद वापस घर लौटे रिखी राम अपने घर नाड़ी लौटने पर परिजनों व रिश्तेदारों के साथ - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

अकसर फिल्मों में देखते हैं कि चोट लगने से याददाश्त चली जाती है और फिर वर्षों बाद लौट आती है। ऐसा ही एक किस्सा हकीकत में हुआ है। सिरमौर के नाड़ी गांव निवासी रिखी राम करीब 45 साल के बाद घर लौट आए। परिवार में जश्न का माहौल है। सिरमौर के ग्राम नाड़ी निवासी रिखी राम वर्ष 1980 में महज 16 साल की उम्र में लापता हो गए। रिखी राम ने बताया कि वह कामकाज की तलाश में हरियाणा के यमुनानगर गए थे। जहां एक होटल में नौकरी करने लगा। एक दिन होटल कर्मी के साथ अंबाला जाते समय सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में सिर पर चोट लगने से याददाश्त चली गई और उन्हें कुछ याद नहीं रहा। इस हादसे के बाद उनका संपर्क अपने गांव और परिवार से पूरी तरह कट गया।

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कोई ऐसा शख्स भी नहीं था, जो उन्हें उसके परिवार तक पहुंचा पाए और न ही दूरसंचार के इतने साधन मौजूद थे कि उसका परिवार उनसे संपर्क कर सके। इस हालत में उनके साथी ने ही उनका नया नाम रवि चौधरी रख दिया और इसी नाम के साथ उन्होंने नई जिंदगी की शुरुआत की। इसके बाद रिखी राम मुंबई चले गए। अब तक भी वह इसी नाम से जिंदगी जी रहे थे। इसके बाद फिर नांदेड़ के एक काॅलेज में नौकरी मिलने पर वहीं बस गए। रिखी राम ने बताया कि वर्ष 1994 में उनकी शादी संतोषी से हुई और आज उनके पास दो बेटियां और एक बेटा है।


 
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रिखी राम की जिंदगी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। अपनी जवानी में हरियाणा में एक सड़क हादसे में रिखी राम ने अपनी याददाश्त खो दी। मुंबई में जब रिखी राम को दोबारा चोट लगी तो धीरे-धीरे याददाश्त लौटने लगी। करीब 45 साल के बाद अब घर लौटा आए। इस अवधि में उनके माता-पिता भी स्वर्ग सिधार गए, लेकिन जब परिवार में भाई- बहनों ने उसे अपने बीच पाया तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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कैफे के नंबर के रूप में मिली पहली कामयाबी
रिखी राम ने बताया कि खोज के दौरान सतौन के एक कैफे का नंबर मिला। कैफे से उन्हें नाड़ी गांव के रुद्र प्रकाश का नंबर मिला। रिखी राम ने अपनी पूरी कहानी रुद्र प्रकाश को सुनाई, लेकिन शुरूआत में रुद्र प्रकाश ने इसे किसी तरह की धोखाधड़ी की संभावना मानकर गंभीरता से नहीं लिया और नजरअंदाज किया। सभी पक्षों की पुष्टि होने के बाद रिखी राम अपनी पत्नी और बच्चों के साथ नाड़ी गांव पहुंचा। गांव में उनका स्वागत भाई दुर्गा राम, चंद्र मोहन, चंद्रमणि और बहन कौशल्या देवी, कला देवी, सुमित्रा देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने फूल मालाओं और बैंड से किया।
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