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छोटे बच्चों को खेल-खेल में सिखाया जा रहा पढ़ना

Mon, 28 Mar 2022 11:54 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2022 11:54 PM IST
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Young children are being taught to read through play
प्राइमरी स्कूल हमीरपुर में प्री प्राइमरी कक्षा के क्लासरूम में मौजूद खेल सामग्री। - फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। दो साल तक घरों में रहे छोटे बच्चों को स्कूलों मेें खेल-खेल में पढ़ाया जा रहा है। इसका मकसद बच्चों को स्कूल किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
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बच्चों को पढ़ने में आसानी हो इस बात का अध्यापक विशेष ध्यान रख रहे हैं। पहले बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया गया है। परीक्षाओं के बाद अप्रैल से प्री प्राइमरी कक्षाएं शुरू होने वाली हैं। उसमें भी बच्चों को खेलकूद गतिविधियों के साथ पढ़ाया जाएगा ताकि उनका संपूर्ण विकास हो सके। इसके लिए शिक्षा विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। बड़ी कक्षाओं की अपेक्षा छोटे बच्चों में कई आदतें बदली हैं।
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इसके चलते उन्हें धीरे-धीरे सामान्य किया जा रहा है। दो वर्ष घरों में रहने के बाद बच्चों का स्कूल में आना, पहले जैसे माहौल में ढलना थोड़ा मुश्किल है। बच्चों के लिए कोरोना से लड़ने के लिए मास्क पहनना चुनौतीपूर्ण है। पहले अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने में डरते थे। बड़े बच्चों की तुलना में छोटे बच्चों को खतरा अत्यधिक रहता है। इसके चलते माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने में घबराहट महसूस कर रहे थे। अब खेल-खेल में बच्चों के सीखने और स्कूल के प्रति रुझान होने के चलते अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से नहीं डर रहे हैं। बच्चे अब स्कूल जाने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा उत्सुक दिखाई दे रहे हैं।
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क्या कहते है विद्यार्थी
खेल-खेल में सिखाया जा रहा : अनिकेत
छात्र अनिकेत का कहना है अब अध्यापक खेल कूद गतिविधियों से पढ़ना सीखा रहे हैं। इससे पूरे विषय आसानी से समझ आ रहे हैं। पहले फोन पर ही ऑनलाइन पढ़ाई हो रही थी। इससे पाठ समझने में परेशानी होती थी।
दो वर्ष घर में रहना पड़ा : वर्षा
छात्रा वर्षा का कहना है कि घर के अंदर रहने से मन उदास रहता था। स्कूल खुलने के बाद अध्यापक ने हर एक गतिविधि करवाई। इससे पढ़ाई में मन लगा। नई आदतें भी सीखने को मिल रही हैं। पेपर खत्म होने के बाद स्कूल बंद हो गए हैं। अगले सप्ताह से स्कूल खुल जाएंगे।
प्रार्थना सभा की जगह बोल रहे गायत्री मंत्र : रूही
छात्रा रूही का कहना है कि कोरोना से पहले प्रार्थना सभा होती थी। अब प्रार्थना सभा की जगह गायत्री मंत्र बुलाया जा रहा है। पहले मास्क के बिना स्कूल आते थे अब मास्क के बिना स्कूलं नही आने दिया जाता। कोरोना के बाद काफी कुछ बदल गया है।
अकेले एक बैंच पर बैठाया जा रहा: शिवा
छात्र शिवा का कहना है कि पहले सभी दोस्त एक साथ बैठते थे। अब अलग-अलग बैठना पड़ रहा है। पहले एक साथ एक बैंच पर दो बच्चे बैठ सकते थे। अब अलग होकर बैठना पड़ रहा है। दो साल घरों पर रहने के बाद स्कूल आए तो स्कूल में गेट से लेकर कक्षा तक हर चीज बदल चुकी थी।
छोटे बच्चों ने सीखीं नई आदतें : नीलम शर्मा
केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला हमीरपुर की सीएचटी नीलम शर्मा का कहना है कि कोरोना के बाद मास्क से लेकर सैनिटाइजर जीवन का हिस्सा बन गए हैं। दो साल घरों में बंद रहने के बाद स्कूल आने में बच्चे आनाकानी कर रहे थे। इसके चलते स्कूल आने में आनाकानी करने वाले बच्चों से हर एक खेलकूद के साथ हरेक गतिविधि करवाई जा रही है ताकि बच्चे मनोरंजन के साथ पढ़ाई कर सके। वहीं स्कूल खुलने पर बच्चों से प्रार्थना सभा की जगह गायत्री मंत्र बुलाया जाता था ताकि बच्चों में नैतिक मूल्यों की कमी न आ सके।

बच्चों से लेकर बूढ़ों की दिनचर्या बदली : रेखा
रोपा स्कूल की अध्यापक रेखा का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बाद स्कूल खुलने पर सबसे अधिक बदलाव छोटे बच्चों में आए हैं। इसके चलते साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए बच्चों से धीरे-धीरे हरेक गतिविधि करवाई जा रही ताकि बच्चों को तनाव मुक्त शिक्षा दी जा सके। छोटे बच्चे खेलकूद में हर चीज को सीखते हैं। इसलिए कक्षा अध्यापक हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि बच्चों को हर एक चीज सिखाई जा सके।
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