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Hamirpur (Himachal) News: चीड़ की पत्तियों को आकार देना सीख रहीं महिलाएं
Wed, 31 Dec 2025 01:39 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 31 Dec 2025 01:39 AM IST
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सलौणी में चीड़ की पत्तियों से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं महिलाएं। संवाद
सलौणी (हमीरपुर)। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वस्त्र मंत्रालय की ओर से विशेष प्रशिक्षण शिविर शुरू किया गया है। इसी कड़ी में सलौणी में करीब 30 महिलाएं 60 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में चीड़ की पत्तियों को सूई और हाथ से आकृति देना सीख रही हैं।
यह प्रशिक्षण शिविर फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण शिविर में डिजाइनर हिना और मास्टर क्रॉप्ट पर्सन कविता महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। चीड़ की पत्तियों को पहले मात्र घास समझा जाता रहा है, लेकिन अब इसका प्रयोग महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कर रही हैं।
ये महिलाएं चीड़ और धागे से न केवल आभूषण बनाना सीख रही हैं, बल्कि रोटी बॉक्स, टोकरी, टैंपल टोकरी, कान के झुमके, हाथ के कड़े, गुड़िया का पहनावा आदि बनाना सीख रही हैं। बाजार में इन डिजाइन वाली टोकरियों की काफी अधिक मांग बढ़ गई है। चीड़ की पत्तियों से बने उत्पाद पर्यावरण के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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पूर्व में इन चीड़ की पत्तियों को आग के हवाले कर दिया जाता था, जिसके कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचता था। ऐसे में महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से बने उत्पाद बनाने की कला सिखाई जा रही है। इस कला को सीखने के बाद महिलाएं हर माह दस से 15 हजार रुपये कमा सकती हैं। मास्टर क्रॉफ्ट पर्सन (एमसीपी) कविता ने बताया कि इस शिविर में 30 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं तथा प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं को प्रमाणपत्र भी वितरित किए जाएंगे।
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यह प्रशिक्षण शिविर फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण शिविर में डिजाइनर हिना और मास्टर क्रॉप्ट पर्सन कविता महिलाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। चीड़ की पत्तियों को पहले मात्र घास समझा जाता रहा है, लेकिन अब इसका प्रयोग महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए कर रही हैं।
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ये महिलाएं चीड़ और धागे से न केवल आभूषण बनाना सीख रही हैं, बल्कि रोटी बॉक्स, टोकरी, टैंपल टोकरी, कान के झुमके, हाथ के कड़े, गुड़िया का पहनावा आदि बनाना सीख रही हैं। बाजार में इन डिजाइन वाली टोकरियों की काफी अधिक मांग बढ़ गई है। चीड़ की पत्तियों से बने उत्पाद पर्यावरण के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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पूर्व में इन चीड़ की पत्तियों को आग के हवाले कर दिया जाता था, जिसके कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचता था। ऐसे में महिलाओं को चीड़ की पत्तियों से बने उत्पाद बनाने की कला सिखाई जा रही है। इस कला को सीखने के बाद महिलाएं हर माह दस से 15 हजार रुपये कमा सकती हैं। मास्टर क्रॉफ्ट पर्सन (एमसीपी) कविता ने बताया कि इस शिविर में 30 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं तथा प्रशिक्षण के बाद इन महिलाओं को प्रमाणपत्र भी वितरित किए जाएंगे।