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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Water sources that once quenched thirst are now themselves yearning for conservation.

Hamirpur (Himachal) News: कभी बुझाते थे प्यास, अब खुद संरक्षण को तरस रहे जलस्रोत

Mon, 10 Aug 2026 01:22 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Mon, 10 Aug 2026 01:22 AM IST
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Water sources that once quenched thirst are now themselves yearning for conservation.
चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद
ऊहल (हमीरपुर)। कभी मवेशियों की प्यास बुझाने वाले पारंपरिक प्राकृतिक जलस्रोत आज खुद संरक्षण को तरस रहे हैं। गांव लगदेवी में मौजूद दो प्राकृतिक जलस्रोत लंबे समय से मरम्मत और संरक्षण की राह देख रहे हैं।
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इनमें से एक लगदेवी-चौरी मार्ग के किनारे खुला पड़ा है। चहारदीवारी न होने के कारण यहां हादसे का खतरा बना हुआ है। जलस्रोत की गहराई का भी स्पष्ट पता नहीं है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है।
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दूसरा जलस्रोत भी झाड़ियों और अव्यवस्था से घिरा है। ग्रामीणों का कहना है कि इन पारंपरिक जलस्रोतों को संरक्षण देकर दोबारा उपयोगी बनाया जा सकता है। वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवित करने पर इनसे पेयजल और पशुओं के लिए पानी की जरूरत पूरी होने के साथ पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
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ग्रामीणों ने सरकार से प्रत्येक पंचायत में मौजूद पारंपरिक जलस्रोतों का सर्वे करवाकर उनकी स्थिति का आकलन करने और संरक्षण, मरम्मत व पुनर्निर्माण के लिए ठोस योजना तैयार करने की मांग की है।

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पारंपरिक जलस्रोतों की मरम्मत आवश्यक है। जलस्रोतों के आसपास चहारदीवारी, साफ-सफाई, सुरक्षित पहुंच मार्ग और उचित निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि सुरक्षा का खतरा भी खत्म हो और इनका उपयोग भी बढ़े। -विजय लगवाल, निवासी लड़ियार
सरकार इन जलस्रोतों को महज पुराने ढांचे के रूप में नहीं, बल्कि गांव की जल-विरासत और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं के रूप में देखे। समय रहते संरक्षण हुआ तो लगदेवी के ये उपेक्षित जलस्रोत फिर से अपनी पहचान बनाएंगे। -रोहित कुमार, निवासी लगदेवी
प्रशासन को इन जलस्त्रोतों की सुध लेनी चाहिए। इनका दोबारा उपयोग किया जा सकता है। प्रशासन से आग्रह है कि समय-समय पर जलस्त्रोतों की मरम्मत करवाए। -रजनीश, निवासी लगदेवी
गर्मियों में पानी की किल्लत होती है। यदि इस पानी को पीने योग्य बनाया जाए तो कम से कम पशु पानी पी सकते हैं। यदि चहारदीवारी नहीं लगाई तो हादसे हो सकते हैं। -रूपलाल, निवासी ऊहल


कोट
प्राकृतिक जल स्त्रोतों को सहेजने के लिए संबंधित पंचायतों के पास बजट उपलब्ध करवाया जाता है। इस बारे में संबंधित पंचायत को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। -विकास शुक्ला, एसडीएम सुजानपुर

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

चहारदीवारी के अभाव में लगदेवी-चौरी मार्ग में जलस्त्रोत। संवाद

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