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Hamirpur (Himachal) News: मिठाइयां बना संवारी बच्चों की जिंदगी, अन्य महिलाओं को भी दिया रोजगार
Mon, 03 Mar 2025 12:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 03 Mar 2025 12:26 AM IST
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बिना तेल घी और चीनी के तैयार की गई मिठाईयां और उत्पाद। जनसंपर्क विभाग।
- फोटो : संवाद
सचित्र
अनीता बिना तेल, घी और चीनी के बना रहीं मिठाई, स्वयं सहायता समूह बना कारोबार शुरू कर पेश की मिसाल
अनीता के हाथों से बनी पपीते और आंवले की बर्फी ने बनाई अलग पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नादौन उपमंडल के रंगस क्षेत्र के गांव जंदली गुजरां की अनीता ठाकुर ने बिना तेल, घी और चीनी के मिठाइयां बना न केवल अपने बच्चों की जिंदगी संवारी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर आत्मर्निर बनाया है।
वह ग्रामीण क्षेत्रों की आम महिलाओं की तरह ही अपना जीवन-यापन कर रही थीं। गाय-भैंस का दूध बेचकर हर माह कुछ आय अर्जित कर रही थीं। इसके बाद अपनी आय बढ़ाने के लिए उन्होंने आतमा परियोजना की मदद से छोटे पैमाने पर पनीर और खोआ का उत्पादन शुरू किया। इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिला स्वयं सहायता समूह के गठन के लिए प्रेरित किया।
अनीता ठाकुर ने राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह का गठन किया और कृषि विज्ञान केंद्र में अचार, चटनी, आंवला कैंडी और अन्य मिठाइयां बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अनीता ठाकुर ने बताया कि मिठाइयों के उत्पादन से उन्हें काफी अच्छी आय हो रही है और इससे लगभग 10 अन्य महिलाओं को भी सीधा रोजगार मिल रहा है। उन्होंने इसी आय से नया मकान बनाया और लड़की की शादी भी की। इसी से वे अपने दो अन्य बच्चों का पालन-पोषण भी कर रही हैं।
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पति की मृत्यु के बाद संभाली परिवार की जिम्मेवारी
कुछ वर्ष पहले पति की मृत्यु के बाद अनीता ठाकुर पर परिवार की पूरी जिम्मेवारी भी आ गई। इसलिए, उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के लिए राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पपीते और आंवले इत्यादि की मिठाई का उत्पादन शुरू करने का निर्णय लिया। आज यह समूह बड़े पैमाने पर पपीते और आंवले की बर्फी, लड्डू, पेड़े और कैंडी तैयार कर रहा है। इन सभी मिठाइयों में घी, तेल और चीनी का प्रयोग नहीं किया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण घी और तेल की चिकनाई तथा चीनी से परहेज करने वाले लोग भी इन मिठाइयों का स्वाद ले सकते हैं।
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अनीता बिना तेल, घी और चीनी के बना रहीं मिठाई, स्वयं सहायता समूह बना कारोबार शुरू कर पेश की मिसाल
अनीता के हाथों से बनी पपीते और आंवले की बर्फी ने बनाई अलग पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नादौन उपमंडल के रंगस क्षेत्र के गांव जंदली गुजरां की अनीता ठाकुर ने बिना तेल, घी और चीनी के मिठाइयां बना न केवल अपने बच्चों की जिंदगी संवारी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर आत्मर्निर बनाया है।
वह ग्रामीण क्षेत्रों की आम महिलाओं की तरह ही अपना जीवन-यापन कर रही थीं। गाय-भैंस का दूध बेचकर हर माह कुछ आय अर्जित कर रही थीं। इसके बाद अपनी आय बढ़ाने के लिए उन्होंने आतमा परियोजना की मदद से छोटे पैमाने पर पनीर और खोआ का उत्पादन शुरू किया। इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिला स्वयं सहायता समूह के गठन के लिए प्रेरित किया।
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अनीता ठाकुर ने राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह का गठन किया और कृषि विज्ञान केंद्र में अचार, चटनी, आंवला कैंडी और अन्य मिठाइयां बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अनीता ठाकुर ने बताया कि मिठाइयों के उत्पादन से उन्हें काफी अच्छी आय हो रही है और इससे लगभग 10 अन्य महिलाओं को भी सीधा रोजगार मिल रहा है। उन्होंने इसी आय से नया मकान बनाया और लड़की की शादी भी की। इसी से वे अपने दो अन्य बच्चों का पालन-पोषण भी कर रही हैं।
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पति की मृत्यु के बाद संभाली परिवार की जिम्मेवारी
कुछ वर्ष पहले पति की मृत्यु के बाद अनीता ठाकुर पर परिवार की पूरी जिम्मेवारी भी आ गई। इसलिए, उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के लिए राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पपीते और आंवले इत्यादि की मिठाई का उत्पादन शुरू करने का निर्णय लिया। आज यह समूह बड़े पैमाने पर पपीते और आंवले की बर्फी, लड्डू, पेड़े और कैंडी तैयार कर रहा है। इन सभी मिठाइयों में घी, तेल और चीनी का प्रयोग नहीं किया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण घी और तेल की चिकनाई तथा चीनी से परहेज करने वाले लोग भी इन मिठाइयों का स्वाद ले सकते हैं।