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लेफ्टिनेंट बनने के बाद अपने प्रारंभिक स्कूल पहुंचे शुभम
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डीएवी स्कूल दरकोटी पहुंचने पर यहां के पूर्व छात्र रहे लेफ्टिनेंट शुभम को सम्मानित करते स्टाफ सद?
- फोटो : Hamirpur-HP
सचित्र-
लेफ्टिनेंट बनने के बाद अपने प्रारंभिक स्कूल पहुंचे शुभम
पाठशाला के उत्थान को दी सहायता राशि
बच्चों के लिए जलेबियों का भंडारा भी लगाया
लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करने की दी प्रेरणा
संवाद न्यूज एजेंसी
टौणी देवी (हमीरपुर)। भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने के बाद शुभम चौहान मंगलवार को अपने प्रारंभिक स्कूल डीएवी दरकोटी पहुंचे। यहां पहुंचकर शुभम ने स्कूल के उत्थान के लिए 31 हजार रुपये दिए हैं। शुभम चौहान ने 21 नवंबर 2020 को कमीशन प्राप्त किया और सेना में लेफ्टिनेंट बने। उन्होंने बताया कि कमीशन प्राप्त करने के बाद ही उसकी इच्छा थी कि वह अपने प्रारंभिक विद्यालय में आएं और इसकी माटी को नमन करें, लेकिन कोरोना की वजह से उन्हें यह सौभाग्य एक साल बाद मंगलवार को मिला। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा का महत्व बहुत होता है, क्योंकि यही शिक्षा जीवन की दशा और दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है।
जिस प्रकार किसी भी भवन की मजबूती का निर्धारण उसकी नींव से होता है, उसी प्रकार मनुष्य की सफलता का निर्धारण उसकी प्रारंभिक शिक्षा से होता है। उनकी पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई इसी विद्यालय से हुई है। विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि अध्यापकों के मार्गदर्शन में अपने लक्ष्य का निर्धारण करें और मेहनत करके उसे हासिल करें। उन्होंने जलेबियों का भंडारा भी बच्चों के लिए लगाया। प्रधानाचार्य महेंद्र सिंह डोगरा ने लेफ्टिनेंट शुभम का आभार व्यक्त किया। शुभम की माता कला स्नातक एवं पिता वाणिज्य के प्रवक्ता के पद पर तैनात हैं। उनकी इस उपलब्धि पर माता-पिता समेत उनके दादा सूबेदार उधम सिंह और दादी कृष्णी देवी और नाना सूबेदार प्रीतम चंद और नानी कमला देवी ने बधाई दी है।
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लेफ्टिनेंट बनने के बाद अपने प्रारंभिक स्कूल पहुंचे शुभम
पाठशाला के उत्थान को दी सहायता राशि
बच्चों के लिए जलेबियों का भंडारा भी लगाया
लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करने की दी प्रेरणा
संवाद न्यूज एजेंसी
टौणी देवी (हमीरपुर)। भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने के बाद शुभम चौहान मंगलवार को अपने प्रारंभिक स्कूल डीएवी दरकोटी पहुंचे। यहां पहुंचकर शुभम ने स्कूल के उत्थान के लिए 31 हजार रुपये दिए हैं। शुभम चौहान ने 21 नवंबर 2020 को कमीशन प्राप्त किया और सेना में लेफ्टिनेंट बने। उन्होंने बताया कि कमीशन प्राप्त करने के बाद ही उसकी इच्छा थी कि वह अपने प्रारंभिक विद्यालय में आएं और इसकी माटी को नमन करें, लेकिन कोरोना की वजह से उन्हें यह सौभाग्य एक साल बाद मंगलवार को मिला। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा का महत्व बहुत होता है, क्योंकि यही शिक्षा जीवन की दशा और दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है।
जिस प्रकार किसी भी भवन की मजबूती का निर्धारण उसकी नींव से होता है, उसी प्रकार मनुष्य की सफलता का निर्धारण उसकी प्रारंभिक शिक्षा से होता है। उनकी पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई इसी विद्यालय से हुई है। विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि अध्यापकों के मार्गदर्शन में अपने लक्ष्य का निर्धारण करें और मेहनत करके उसे हासिल करें। उन्होंने जलेबियों का भंडारा भी बच्चों के लिए लगाया। प्रधानाचार्य महेंद्र सिंह डोगरा ने लेफ्टिनेंट शुभम का आभार व्यक्त किया। शुभम की माता कला स्नातक एवं पिता वाणिज्य के प्रवक्ता के पद पर तैनात हैं। उनकी इस उपलब्धि पर माता-पिता समेत उनके दादा सूबेदार उधम सिंह और दादी कृष्णी देवी और नाना सूबेदार प्रीतम चंद और नानी कमला देवी ने बधाई दी है।
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