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Hamirpur (Himachal) News: सेवानिवृत्त कैप्टन ने घर पर तैयार किया ऑर्गेनिक बगीचा
Mon, 12 Aug 2024 01:34 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 12 Aug 2024 01:34 AM IST
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रंगस (हमीरपुर)। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन रमेश परमार ने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद का समय एक नई और महत्वपूर्ण दिशा में लगा दिया है। रैल क्षेत्र से संबंध रखने वाले कैप्टन परमार ने अपने घर के आसपास एक ऑर्गेनिक बगीचा तैयार किया है, जिसमें वे पूर्ण रूप से केमिकल-फ्री खेती कर रहे हैं। इस बगीचे में उगाई गई सब्जियों और फलों को वे न केवल खुद उपयोग करते हैं, बल्कि अपने पड़ोसियों को भी भेंट करते हैं, जिससे वे भी ऑर्गेनिक खेती के महत्व और लाभों से प्रेरित हो रहे हैं।
कैप्टन परमार ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने जीवन को एक नई दिशा देने का विचार किया। उन्होंने सोचा कि क्यों न केमिकल-फ्री खेती की जाए, जिससे शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों का उत्पादन किया जा सके। इस विचार से प्रेरित होकर उन्होंने अपने बगीचे और खेतों में पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक और प्राकृतिक तरीके से खेती शुरू की।
स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति समर्पण
कैप्टन परमार का मानना है कि ऑर्गेनिक खेती न केवल शुद्ध खाद्य पदार्थों के उत्पादन में मदद करती है, बल्कि यह कृषि कार्यों में श्रमदान करके व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने का भी एक तरीका है। उन्होंने बताया कि नई ग्रोइंग तकनीक अपनाने से वे अपने खेतों में समय से पहले फल प्राप्त करने में सफल हुए हैं। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त 2023 को औधानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी से खरीदे गए केवल दो फीट ऊंचे नींबू के पौधे में वर्तमान में 20 से अधिक फल लग चुके हैं और अगले सीजन का फूल भी आना शुरू हो गया है।
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प्राकृतिक खेती की सफलता और भविष्य
कैप्टन परमार ने बताया कि उन्होंने अन्य फलदार पौधों से भी कई किस्म के फल समय से पहले प्राप्त किए हैं। उनका मानना है कि रासायनिक उर्वरकों का कम से कम प्रयोग करके और ऑर्गेनिक तथा प्राकृतिक खेती की ओर ध्यान देकर न केवल शुद्ध खाद्य पदार्थों का उत्पादन किया जा सकता है, बल्कि इससे जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाई जा सकती है। कैप्टन परमार का यह प्रयास न केवल उन्हें आत्मसंतुष्टि और स्वास्थ्य लाभ दे रहा है, बल्कि उनके आस-पड़ोस के लोगों को भी ऑर्गेनिक खेती की ओर प्रेरित कर रहा है।
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कैप्टन परमार ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने जीवन को एक नई दिशा देने का विचार किया। उन्होंने सोचा कि क्यों न केमिकल-फ्री खेती की जाए, जिससे शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों का उत्पादन किया जा सके। इस विचार से प्रेरित होकर उन्होंने अपने बगीचे और खेतों में पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक और प्राकृतिक तरीके से खेती शुरू की।
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स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति समर्पण
कैप्टन परमार का मानना है कि ऑर्गेनिक खेती न केवल शुद्ध खाद्य पदार्थों के उत्पादन में मदद करती है, बल्कि यह कृषि कार्यों में श्रमदान करके व्यक्ति को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने का भी एक तरीका है। उन्होंने बताया कि नई ग्रोइंग तकनीक अपनाने से वे अपने खेतों में समय से पहले फल प्राप्त करने में सफल हुए हैं। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त 2023 को औधानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी से खरीदे गए केवल दो फीट ऊंचे नींबू के पौधे में वर्तमान में 20 से अधिक फल लग चुके हैं और अगले सीजन का फूल भी आना शुरू हो गया है।
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प्राकृतिक खेती की सफलता और भविष्य
कैप्टन परमार ने बताया कि उन्होंने अन्य फलदार पौधों से भी कई किस्म के फल समय से पहले प्राप्त किए हैं। उनका मानना है कि रासायनिक उर्वरकों का कम से कम प्रयोग करके और ऑर्गेनिक तथा प्राकृतिक खेती की ओर ध्यान देकर न केवल शुद्ध खाद्य पदार्थों का उत्पादन किया जा सकता है, बल्कि इससे जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाई जा सकती है। कैप्टन परमार का यह प्रयास न केवल उन्हें आत्मसंतुष्टि और स्वास्थ्य लाभ दे रहा है, बल्कि उनके आस-पड़ोस के लोगों को भी ऑर्गेनिक खेती की ओर प्रेरित कर रहा है।