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गायनी वार्ड की मरम्मत के चलते बाहर लगाए गर्भवती महिलाओं के बिस्तर
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मेडिकल कॉलेज के गायनी वार्ड में एक बिस्तर पर मौजूद दो-दो मरीज।
- फोटो : Hamirpur-HP
सचित्र.
गायनी वार्ड की मरम्मत के चलते बाहर लगाए गर्भवती महिलाओं के बिस्तर
मेडिकल कॉलेज में ठंड में ठिठुरने को मजबूर गर्भवतियां और तीमारदार
एक बिस्तर पर दो-दो मरीज होने से भी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर।
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के गायनी वार्डों में एक बिस्तर पर दो-दो महिला मरीज भर्ती हैं। इससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्त्री रोग विभाग के लेबर रूम और साथ लगते गायनी वार्ड का मरम्मत कार्य चला हुआ है। इसके चलते अस्पताल प्रबंधन ने लेबर रूम के बाहर ही खुले में बिस्तर लगा दिए हैं।
यहां गर्भवतियों को रातभर ठंड से ठिठुरना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के अंदर स्त्री रोग वार्डों में आजकल महिलाओं की भीड़ होने के चलते एक बिस्तर पर दो-दो मरीज मौजूद हैं। ऐसे में दोनों मरीजों को रात को सोने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, तीमारदारों को बाहर या नीचे ही अपना बिस्तर लगाना पड़ रहा है। लेबर रूम के बाहर खुले में लगे बिस्तरों पर महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मंगलवार को जब अमर उजाला की टीम मौके पर गई तो एक गर्भवती महिला के तीमारदार किशोरी लाल ने कहा कि रातभर बाहर लगे बिस्तर पर रहे। अंदर बिस्तर नहीं मिला। इस कारण मरीज को परेशानी झेलनी पड़ी। राजकुमार ने कहा कि वह अपनी पत्नी को लेकर दो दिन अस्पताल में रहे, लेकिन उन्हें किसी अन्य मरीज के साथ बिस्तर दे दिया गया। पत्नी बड़ी मुश्किल से अन्य मरीज के साथ रहीं, जबकि वह स्वयं नीचे बिस्तर लगाकर रुके। इस संबंध में एमएस डॉ. आरके अग्निहोत्री ने कहा कि आजकल मरीज अधिक आने से बिस्तरों की कमी पड़ रही है। मरीजों को कहीं बाहर रेफर करने की बजाय इन्हें यहीं पर उपचार दिया जा रहा है। लेबर रूम का मरम्मत कार्य चल रहा है।
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गायनी वार्ड की मरम्मत के चलते बाहर लगाए गर्भवती महिलाओं के बिस्तर
मेडिकल कॉलेज में ठंड में ठिठुरने को मजबूर गर्भवतियां और तीमारदार
एक बिस्तर पर दो-दो मरीज होने से भी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर।
डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के गायनी वार्डों में एक बिस्तर पर दो-दो महिला मरीज भर्ती हैं। इससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्त्री रोग विभाग के लेबर रूम और साथ लगते गायनी वार्ड का मरम्मत कार्य चला हुआ है। इसके चलते अस्पताल प्रबंधन ने लेबर रूम के बाहर ही खुले में बिस्तर लगा दिए हैं।
यहां गर्भवतियों को रातभर ठंड से ठिठुरना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के अंदर स्त्री रोग वार्डों में आजकल महिलाओं की भीड़ होने के चलते एक बिस्तर पर दो-दो मरीज मौजूद हैं। ऐसे में दोनों मरीजों को रात को सोने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, तीमारदारों को बाहर या नीचे ही अपना बिस्तर लगाना पड़ रहा है। लेबर रूम के बाहर खुले में लगे बिस्तरों पर महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मंगलवार को जब अमर उजाला की टीम मौके पर गई तो एक गर्भवती महिला के तीमारदार किशोरी लाल ने कहा कि रातभर बाहर लगे बिस्तर पर रहे। अंदर बिस्तर नहीं मिला। इस कारण मरीज को परेशानी झेलनी पड़ी। राजकुमार ने कहा कि वह अपनी पत्नी को लेकर दो दिन अस्पताल में रहे, लेकिन उन्हें किसी अन्य मरीज के साथ बिस्तर दे दिया गया। पत्नी बड़ी मुश्किल से अन्य मरीज के साथ रहीं, जबकि वह स्वयं नीचे बिस्तर लगाकर रुके। इस संबंध में एमएस डॉ. आरके अग्निहोत्री ने कहा कि आजकल मरीज अधिक आने से बिस्तरों की कमी पड़ रही है। मरीजों को कहीं बाहर रेफर करने की बजाय इन्हें यहीं पर उपचार दिया जा रहा है। लेबर रूम का मरम्मत कार्य चल रहा है।
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