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वैक्सीनेशन से न छूटे कोई भी बच्चा : अमरजीत
Wed, 21 May 2025 01:08 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 21 May 2025 01:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण एवं प्रतिरक्षण कार्यक्रम की जिला स्तरीय टास्क फोर्स, सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा की जिला स्तरीय समन्वय समिति की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता डीसी अमजरजीत सिंह ने की।
उपायुक्त ने कहा कि छोटे बच्चों को अलग-अलग समय पर 12 वैक्सीन पूरी तरह निशुल्क दी जाती हैं, जो इन्हें कई रोगों से बचाती हैं। उन्होंने कहा कि जिला में लगभग 97.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी अस्पतालों में ही करवाई जा रही है, जिससे वैक्सीनेशन की कवरेज की प्रतिशतता भी काफी अच्छी है।
उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा आयुर्वेद विभाग, महिला एवं बाल विकास सहित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण है। पांच साल तक के बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए एक मई से 30 जून तक सघन डायरिया नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है।
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इस अभियान के तहत अभी तक लगभग 10,519 बच्चों को ओआरएस के 17,259 पैकेट और जिंक की 1,13,513 गोलियां बांटी जा चुकी हैं। इस दौरान डायरिया के 18 मामलों का पता भी चला है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों के अलावा जिला के दूरस्थ गांवों में हेल्थ वर्करों, आशा वर्करों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी ओआरएस और दवाइयां घर-घर पहुंचाई जा रही हैं।
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हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण एवं प्रतिरक्षण कार्यक्रम की जिला स्तरीय टास्क फोर्स, सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा की जिला स्तरीय समन्वय समिति की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता डीसी अमजरजीत सिंह ने की।
उपायुक्त ने कहा कि छोटे बच्चों को अलग-अलग समय पर 12 वैक्सीन पूरी तरह निशुल्क दी जाती हैं, जो इन्हें कई रोगों से बचाती हैं। उन्होंने कहा कि जिला में लगभग 97.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी अस्पतालों में ही करवाई जा रही है, जिससे वैक्सीनेशन की कवरेज की प्रतिशतता भी काफी अच्छी है।
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उन्होंने कहा कि शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा आयुर्वेद विभाग, महिला एवं बाल विकास सहित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण है। पांच साल तक के बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए एक मई से 30 जून तक सघन डायरिया नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है।
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इस अभियान के तहत अभी तक लगभग 10,519 बच्चों को ओआरएस के 17,259 पैकेट और जिंक की 1,13,513 गोलियां बांटी जा चुकी हैं। इस दौरान डायरिया के 18 मामलों का पता भी चला है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों के अलावा जिला के दूरस्थ गांवों में हेल्थ वर्करों, आशा वर्करों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी ओआरएस और दवाइयां घर-घर पहुंचाई जा रही हैं।