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कोरोना की दूसरी लहर में भी मनरेगा से मिल रहा है रोजगार
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हमीरपुर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से रोजगार पर ही संकट खड़ा हो गया है। ऐसी परिस्थितियों में हमीरपुर जिले के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा आम लोगों के लिए बड़ा सहारा साबित हुई है। इस वित्त वर्ष के करीब ढाई महीनों में ही जिले में मनरेगा के तहत 5 करोड़ 78 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। नादौन विकास खंड की ग्राम पंचायत गाहली में मनरेगा में कार्य कर रही प्रीतां देवी, आशा रानी, मंजू, रोशनी, कमलेश, सुनीता और अन्य महिलाओं ने बताया कि कोरोना संकट के इस दौर में भी उन्हें अपने गांव में ही रोजगार मिल रहा है।
ग्राम पंचायत गाहली के प्रधान जोगिंद्र सिंह ने बताया कि उनकी पंचायत में कोरोना संबंधी सभी आवश्यक सावधानियों के साथ मनरेगा के तहत कई कार्य करवाए जा रहे हैं। उधर, उपायुक्त देवश्वेता बनिक ने बताया कि मनरेगा के तहत जिले में 99,129 परिवारों का पंजीकरण किया गया है। कोरोना संकट के बावजूद वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान हमीरपुर जिले में मनरेगा के तहत लगभग साढ़े 46 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच यानी पहली अप्रैल को आरंभ हुए वित्त वर्ष 2021-22 में भी अभी तक जिले में मनरेगा के तहत 5 करोड़ 78 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जा चुकी है। दस जून तक जिले में 2,52,804 श्रम दिवस अर्जित किए गए, जिनमें से महिलाओं ने 1,93,300 श्रम दिवस अर्जित किए। यानी इस योजना में महिलाओं की भागीदारी लगभग साढ़े 76 फीसदी रही।
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ग्राम पंचायत गाहली के प्रधान जोगिंद्र सिंह ने बताया कि उनकी पंचायत में कोरोना संबंधी सभी आवश्यक सावधानियों के साथ मनरेगा के तहत कई कार्य करवाए जा रहे हैं। उधर, उपायुक्त देवश्वेता बनिक ने बताया कि मनरेगा के तहत जिले में 99,129 परिवारों का पंजीकरण किया गया है। कोरोना संकट के बावजूद वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान हमीरपुर जिले में मनरेगा के तहत लगभग साढ़े 46 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच यानी पहली अप्रैल को आरंभ हुए वित्त वर्ष 2021-22 में भी अभी तक जिले में मनरेगा के तहत 5 करोड़ 78 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जा चुकी है। दस जून तक जिले में 2,52,804 श्रम दिवस अर्जित किए गए, जिनमें से महिलाओं ने 1,93,300 श्रम दिवस अर्जित किए। यानी इस योजना में महिलाओं की भागीदारी लगभग साढ़े 76 फीसदी रही।
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