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Hamirpur (Himachal) News: झुग्गियों में रहने वाले प्रवासी बच्चे नहीं पहुंच रहे स्कूल, कैसे सुधरेगी हालत
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शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल अभियान चलाने के बावजूद नहीं लिया दाखिला
शिक्षा अधिनियम के तहत सभी बच्चों को शिक्षित करना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नादौन (कांगू) (हमीरपुर)। शिक्षा खंड नादौन के तहत झुग्गियों में रहने वाले कई प्रवासी बच्चे स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। नादौन में ब्यास नदी के किनारे कई प्रवासी लोग झुग्गियों में रह कर अपना जीवन बसर कर रहे हैं। दिन में ये लोग मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं लेकिन इनमें से कई परिवार अपने नौनिहालों को शिक्षा देने में पिछड़ रहे हैं। कई बार ये प्रवासी अपने छोटे बच्चों को मजदूरी करवाने के लिए अपने साथ ले जाते हैं या फिर झुग्गी में इन्हें अकेला छोड़ देते हैं। यह बच्चे स्कूल न जाकर पूरा दिन ब्यास नदी में नहाते और खेलते नजर आते हैं। यहां पर पढ़ने और पढ़ाने वाले दोनों मौजूद हैं लेकिन नौनिहालों को स्कूल तक कैसे पहुंचाया जाए, यह समस्या बनी हुई हैं। समाजसेवी संस्थाएं भी इन प्रवासी बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए अथक प्रयास करती हैं लेकिन यह योजना कुछ समय तक ही कामयाब रहती है। मंगलवार को ब्यास नदी किनारे पहुंचकर जब इसका जायजा लिया तो दो दर्जन से अधिक बच्चों में से दस से बारह बच्चे स्कूल गए थे जबकि अन्य झुग्गियों में ही मौजूद थे। शिक्षा अधिनियम के तहत बच्चों को शिक्षित करना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस बारे में खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी नादौन रीता शर्मा ने कहा कि समस्त नादौन खंड में करीब 70 प्रवासी बच्चों के दाखिले किए गए हैं और यह दाखिले निरंतर जारी हैं। कुछ प्रवासी बच्चों के कागजात पूरे न होने के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है। ऐसे बच्चों के दाखिले नॉन रेजिडेंशियल कन्या स्कूल नादौन किए जा सकते हैं। नदी किनारे ठहरे प्रवासी बच्चों की संख्या जुटाई जा रही है।
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शिक्षा अधिनियम के तहत सभी बच्चों को शिक्षित करना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी
संवाद न्यूज एजेंसी
नादौन (कांगू) (हमीरपुर)। शिक्षा खंड नादौन के तहत झुग्गियों में रहने वाले कई प्रवासी बच्चे स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। नादौन में ब्यास नदी के किनारे कई प्रवासी लोग झुग्गियों में रह कर अपना जीवन बसर कर रहे हैं। दिन में ये लोग मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं लेकिन इनमें से कई परिवार अपने नौनिहालों को शिक्षा देने में पिछड़ रहे हैं। कई बार ये प्रवासी अपने छोटे बच्चों को मजदूरी करवाने के लिए अपने साथ ले जाते हैं या फिर झुग्गी में इन्हें अकेला छोड़ देते हैं। यह बच्चे स्कूल न जाकर पूरा दिन ब्यास नदी में नहाते और खेलते नजर आते हैं। यहां पर पढ़ने और पढ़ाने वाले दोनों मौजूद हैं लेकिन नौनिहालों को स्कूल तक कैसे पहुंचाया जाए, यह समस्या बनी हुई हैं। समाजसेवी संस्थाएं भी इन प्रवासी बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए अथक प्रयास करती हैं लेकिन यह योजना कुछ समय तक ही कामयाब रहती है। मंगलवार को ब्यास नदी किनारे पहुंचकर जब इसका जायजा लिया तो दो दर्जन से अधिक बच्चों में से दस से बारह बच्चे स्कूल गए थे जबकि अन्य झुग्गियों में ही मौजूद थे। शिक्षा अधिनियम के तहत बच्चों को शिक्षित करना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस बारे में खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी नादौन रीता शर्मा ने कहा कि समस्त नादौन खंड में करीब 70 प्रवासी बच्चों के दाखिले किए गए हैं और यह दाखिले निरंतर जारी हैं। कुछ प्रवासी बच्चों के कागजात पूरे न होने के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है। ऐसे बच्चों के दाखिले नॉन रेजिडेंशियल कन्या स्कूल नादौन किए जा सकते हैं। नदी किनारे ठहरे प्रवासी बच्चों की संख्या जुटाई जा रही है।