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जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ 34 मेडिकल स्टोरों और दुकानों में दबिश
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बड़सर में मेडिकल स्टोर का निरीक्षण करतीं खाद्य आपूर्ति विभाग की इंस्पेक्टर रिचा।
- फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। कोरोना वायरस के चलते बढ़ी सैनिटाइजर और मास्क की मांग के मद्देनजर इनकी जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ मंगलवार को खाद्य आपूर्ति विभाग की टीमों ने जिलाभर की 34 दुकानों और मेडिकल स्टोरों में दबिश दी। इस दौरान जिला के मेडिकल कॉलेज सहित प्रमुख अस्पतालों के बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों और दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया। हालांकि, इस निरीक्षण के दौरान दुकानों और मेडिकल स्टोरों में सैनिटाइजर और मास्क की जमाखोरी और मुनाफाखोरी नहीं पाई गई। फिर भी जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक शिवराम राही ने मेडिकल स्टोर संचालकों को इस बारे में खास हिदायत दी है। सैनिटाइजर और मास्क को आवश्यक वस्तुएं घोषित करने के बाद अब इन्हें बेचने वाले दुकानदारों व मेडिकल स्टोर संचालकों को इनकी रेट लिस्ट संबंधित दुकानों के बाहर लगानी होगी।
विभागीय टीमों ने दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि सैनिटाइजर की जमाखोरी या अधिक मूल्य वसूलने पर संबंधित दुकानदार या मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उसे जेल भी जाना पड़ सकता है। वहीं, बड़सर में विभाग की इंस्पेक्टर रिचा ने क्षेत्र के मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालकों को मास्क तथा सैनिटाइजर निर्धारित रेट पर बेचने के निर्देश दिए। डीएफएससी शिवराम राही ने कहा कि मंगलवार को 34 दुकानों और मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया गया। आए दिन विभागीय टीमें जिलाभर में इसका निरीक्षण करेंगी। दुकानदारों और मेडिकल स्टोर संचालकों को इन जरूरी वस्तुओं की रेट लिस्ट दुकानों के बाहर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, ड्रग इंस्पेक्टर बसंत मित्तल ने कहा कि विभाग को जिले के मेडिकल स्टोरों की सूची उपलब्ध करवा दी गई है। सैनिटाइजर की जमाखोरी व मुनाफाखोरी पर संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
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सैनिटाइजर बनाने के लिए खत्म हो लाइसेंस का अड़ंगा
जिले के लोगों रंजन शर्मा, अश्वनी शर्मा, बंटू, राजेश कुमार ने कहा कि सैनिटाइजर हर दुकान पर बिकता है और यह कोई घातक ड्रग भी नहीं है तो इसका निर्माण करने वाली कंपनियों को लाइसेंस का अड़ंगा खत्म कर देना चाहिए। इससे एक तो बाजार में सैनिटाइजर्स आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे और इनकी जमाखोरी व मुनाफाखोरी भी रुकेगी। लाइसेंस के पचड़े के कारण ही अधिकतर लोग इसका निर्माण करने से कतराते हैं। लाइसेंस नहीं बनाने की स्थिति में गुणवत्ता के संबंध में इसके सैंपल की जांच और निर्माताओं को उचित निर्देश दिए जाएं। इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर बसंत मित्तल का कहना है कि सैनिटाइजर निर्माण के लिए निर्माता को लाइसेंस जरूरी होता है। इस सुझाव पर विभाग ही निर्णय ले सकता है।
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विभागीय टीमों ने दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि सैनिटाइजर की जमाखोरी या अधिक मूल्य वसूलने पर संबंधित दुकानदार या मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उसे जेल भी जाना पड़ सकता है। वहीं, बड़सर में विभाग की इंस्पेक्टर रिचा ने क्षेत्र के मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल स्टोर संचालकों को मास्क तथा सैनिटाइजर निर्धारित रेट पर बेचने के निर्देश दिए। डीएफएससी शिवराम राही ने कहा कि मंगलवार को 34 दुकानों और मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया गया। आए दिन विभागीय टीमें जिलाभर में इसका निरीक्षण करेंगी। दुकानदारों और मेडिकल स्टोर संचालकों को इन जरूरी वस्तुओं की रेट लिस्ट दुकानों के बाहर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, ड्रग इंस्पेक्टर बसंत मित्तल ने कहा कि विभाग को जिले के मेडिकल स्टोरों की सूची उपलब्ध करवा दी गई है। सैनिटाइजर की जमाखोरी व मुनाफाखोरी पर संबंधित मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
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सैनिटाइजर बनाने के लिए खत्म हो लाइसेंस का अड़ंगा
जिले के लोगों रंजन शर्मा, अश्वनी शर्मा, बंटू, राजेश कुमार ने कहा कि सैनिटाइजर हर दुकान पर बिकता है और यह कोई घातक ड्रग भी नहीं है तो इसका निर्माण करने वाली कंपनियों को लाइसेंस का अड़ंगा खत्म कर देना चाहिए। इससे एक तो बाजार में सैनिटाइजर्स आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे और इनकी जमाखोरी व मुनाफाखोरी भी रुकेगी। लाइसेंस के पचड़े के कारण ही अधिकतर लोग इसका निर्माण करने से कतराते हैं। लाइसेंस नहीं बनाने की स्थिति में गुणवत्ता के संबंध में इसके सैंपल की जांच और निर्माताओं को उचित निर्देश दिए जाएं। इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर बसंत मित्तल का कहना है कि सैनिटाइजर निर्माण के लिए निर्माता को लाइसेंस जरूरी होता है। इस सुझाव पर विभाग ही निर्णय ले सकता है।
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