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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Lakhs defrauded by posing as DCP Mumbai, Hamirpur police returned it in five days

Hamirpur (Himachal) News: डीसीपी मुंबई बनकर ठगे लाखों, हमीरपुर पुलिस ने पांच दिन में लौटाए

Sat, 03 Aug 2024 04:15 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2024 04:15 AM IST
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पीड़ित ने एफडी तुड़वाकर शातिर के खाते में जमा करवाए थे 5 लाख 34 हजार
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साइबर पोर्टल पर केस को अपलोड कर साइबर यूनिट हमीरपुर ने सुलझाया केस

संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। जिले के गलोड़ निवासी व्यक्ति से 5 लाख 34 हजार की ऑनलाइन ठगी के मामले को हमीरपुर पुलिस ने पांच दिन में सुलझा लिया है। साइबर फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को पुलिस के माध्यम से यह पैसा वापस मिल गया है। कस्टम में ड्रग, हवाला के पैसों और आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता होने का डर दिखाकर यह ठगी 24 जुलाई को अंजाम दी गई थी।

ठगी के लिए शातिरों ने ऐसा जाल बुना कि पढ़े लिखे गलोड़ निवासी बाल चंद राजपूत उनके झांसे में आ गए और अपनी पांच लाख 34 हजार की एफडी तोड़कर शातिर के खाते में पैसा जमा करवा दिया। पुलिस को दी शिकायत में बाल चंद ने कहा कि 24 जुलाई को उन्हें अनजान नंबर से कॉल आई। इस दौरान कहा गया कि वह कस्टम के अधिकारी बोल रहे हैं। उनको डराया गया कि कस्टम में उनके नाम का कुरियर है जो मुंबई से ताइवान के लिए बुक है। इस कुरियर में ड्रग पकड़े जाने की बात कही गई। इसके बाद डीसीपी मुंबई बताकर किसी व्यक्ति ने उनसे बात की। शातिर ने कहा कि वह डीसीपी मुंबई हैं। बाल चंद राजपूत को बताया गया कि उनके आधार कार्ड पर विभिन्न बैंकों में खाते हैं। इन बैंक खातों में हवाला का पैसा और इस पैसे का आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया है। आधार कार्ड का दुरुपयोग होने पर उन्हें पुलिस की गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। डर में उन्होंने पांच लाख 34 हजार की एफडी तुड़वा कर पैसा शातिर के खाते में जमा करवा दिया। 25 जुलाई को जब उन्हें ठगी का शक हुआ तो उन्होंने पुलिस को सूचित किया। हमीरपुर पुलिस की साइबर यूनिट के गठन के बाद टीम को यह पहला केस दिया गया था। इस टीम में एएसआई अमी चंद, कांस्टेबल दीपक कुमार और रोहिन शर्मा शामिल रहे। इस यूनिट ने अपने पहले ही केस को पांच दिन में क्रैक कर पैसा पीड़ित को लौटा दिया है।
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ऐसे पुलिस ने लौटाया पैसा
25 जुलाई को हमीरपुर पुलिस को इस संदर्भ में सूचित किया। एसपी हमीरपुर भगत सिंह की ओर से यह केस साइबर यूनिट हमीरपुर टीम को सौंपा गया। इस केस को साइबर पोर्टल पर अपलोड किया गया। इसके तुरंत बाद साइबर यूनिट ने कार्रवाई करते हुए जिस खाते में पैसा डाला गया था उन खातों को फ्रिज कर दिया। इन खातों से यह पैसा अन्य खातों में भेज दिया गया था लेकिन पुलिस ने सभी खातों को फ्रिज कर दिया। इसके बाद तीन दिन की कार्रवाई के भीतर पुलिस ने साइबर पोर्टल की शिकायत की कॉपी कोर्ट में पेश की। इसके बाद अदालत से पैसों के रिलीज आर्डर जारी हुआ। पहली अगस्त को पुलिस के माध्यम से पीड़ित के बैंक खातों में पैसा वापस आया।
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कोट्स

पुलिस अधीक्षक हमीरपुर भगत सिंह ने कहा कि साइबर टीम ने अच्छा कार्य किया है। इस तरह के मामलों में सभी लोग सतर्कता बरतें और साइबर अपराध का शिकार होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। हाईकोर्ट के निर्देश हैं कि इस तरह के मामलों में पैसा रिलीज करने के लिए एफआईआर की जरूरत नहीं है। ऐसे में साइबर पोर्टल पर शिकायत की कॉपी के आधार पर कोर्ट में बांड भरकर पीड़ित को रिलीज आर्डर जारी हुआ। साइबर फ्राड होने पर तुरंत 1930 नंबर पर शिकायत करें। शिकायतकर्ता बाल चंद राजपूत ने कहा कि पुलिस ने बेहतर ढंग से उनके केस को सुलझाया है। पुलिस की मुस्तैदी से उनको पांच लाख 34 हजार वापस मिल गए हैं।
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