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Chamba News: टैग हटाकर बेसहारा छोड़ दिए मवेशी, भटियात में किसानों की फसल पर संकट
Tue, 15 Apr 2025 05:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 15 Apr 2025 05:45 AM IST
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किसानों की उगाई गेहूं और जौ की फसल को उजाड़ रहे बेसहारा पशु, हो रहा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिहुंता (चंबा)। भटियात क्षेत्र के किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं और जौ की फसल को बेसहारा मवेशी उजाड़ रहे हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि जब गाय दूध देना बंद कर देती है, तो कुछ लोग चोरी-छिपे उनके कानों से टैग हटाकर उन्हें सड़कों पर छोड़ जाते हैं। ऐसे में पशु दिनभर खेतों में घूमते हैं और रातों को फसल चट कर जाते हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। किसानों ने कहा कि टैग हटाना जानबूझकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है, जो पशु क्रूरता के साथ-साथ कानूनी अपराध भी है। इनके खिलाफ कोई उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
किसानों में कुलभूषण, जगदीश कुमार, अशोक कुमार, प्रेम लाल, महिंद्र सिंह, बेदी सिंह ने कहा कि सरकार ने भले ही गोशालाओं के लिए योजनाएं चला रखी हों लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में ऐसी व्यवस्थाएं या तो हैं ही नहीं या फिर बदहाल स्थिति में हैं। पशुओं को छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। यदि अब भी प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले सीजन में किसान खेती छोड़ने को मजबूर होंगे। यह किसी एक किसान की नहीं, पूरे अन्नदाता समाज की हार होगी। बेसहारा पशु न केवल फसलें तबाह कर रहे हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को भी बढ़ा रहे हैं। बेसहारा पशुओं से तंग आकर वैसे ही कुछ किसानों ने खेती करना छोड़ दी है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों पर घूम रहे पशुओं से निजात दिलाई जाए। साथ ही जो लोग टैग निकालकर मवेशियों को सड़क पर छोड़ जाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
बिना टैग के पशु मालिक की पहचान करना मुश्किल है। अगर स्थानीय लोगों को पशुओं की पहचान हो तो इसकी विभाग के पास शिकायत कर सकते हैं। उसके बाद इस पर कार्रवाई की जा सकती है।
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-डॉ. मुंशी कपूर, उपनिदेशक पशुपालन विभाग चंबा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिहुंता (चंबा)। भटियात क्षेत्र के किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं और जौ की फसल को बेसहारा मवेशी उजाड़ रहे हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि जब गाय दूध देना बंद कर देती है, तो कुछ लोग चोरी-छिपे उनके कानों से टैग हटाकर उन्हें सड़कों पर छोड़ जाते हैं। ऐसे में पशु दिनभर खेतों में घूमते हैं और रातों को फसल चट कर जाते हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। किसानों ने कहा कि टैग हटाना जानबूझकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है, जो पशु क्रूरता के साथ-साथ कानूनी अपराध भी है। इनके खिलाफ कोई उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
किसानों में कुलभूषण, जगदीश कुमार, अशोक कुमार, प्रेम लाल, महिंद्र सिंह, बेदी सिंह ने कहा कि सरकार ने भले ही गोशालाओं के लिए योजनाएं चला रखी हों लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में ऐसी व्यवस्थाएं या तो हैं ही नहीं या फिर बदहाल स्थिति में हैं। पशुओं को छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। यदि अब भी प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले सीजन में किसान खेती छोड़ने को मजबूर होंगे। यह किसी एक किसान की नहीं, पूरे अन्नदाता समाज की हार होगी। बेसहारा पशु न केवल फसलें तबाह कर रहे हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को भी बढ़ा रहे हैं। बेसहारा पशुओं से तंग आकर वैसे ही कुछ किसानों ने खेती करना छोड़ दी है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों पर घूम रहे पशुओं से निजात दिलाई जाए। साथ ही जो लोग टैग निकालकर मवेशियों को सड़क पर छोड़ जाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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बिना टैग के पशु मालिक की पहचान करना मुश्किल है। अगर स्थानीय लोगों को पशुओं की पहचान हो तो इसकी विभाग के पास शिकायत कर सकते हैं। उसके बाद इस पर कार्रवाई की जा सकती है।
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-डॉ. मुंशी कपूर, उपनिदेशक पशुपालन विभाग चंबा