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सुजानपुर विस क्षेत्र से कैप्टन रणजीत सिंह होंगे भाजपा प्रत्याशी
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सुजानपुर से भाजपा प्रत्याशी कैप्टन रणजीत सिंह
- फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। भाजपा हाईकमान ने सुजानपुर सीट से इस बार सेना से रिटायर्ड कैप्टन रणजीत सिंह पर दांव खेला है। 2017 में सुजानपुर सीट से पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को पार्टी ने टिकट दिया था, लेकिन वह 1919 मतों के अंतर से कांग्रेस के राजेंद्र राणा से पराजित हो गए थे। इस बार भाजपा ने कैप्टन रणजीत सिंह (सेना मेडल) को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है। कैप्टन रणजीत सिंह वर्तमान में जिला परिषद वार्ड बीड़ बगेहड़ा से सदस्य निर्वाचित हैं। साथ ही भाजपा सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।
वह इससे पूर्व सुजानपुर मंडल के अध्यक्ष और मंडल संयोजक व हमीरपुर भाजपा के उपाध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। सुजानपुर चुनावी हलके में पूर्व सैनिकों और सैनिकों की संख्या छह हजार से अधिक है। पार्टी हाईकमान ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों के वोट साधने के लिए यहां से कैप्टन रणजीत सिंह को टिकट दिया है। वहीं, दूसरा कारण यह भी है कि सुजानपुर से धूमल के अलावा कोई भी व्यक्ति राजेंद्र राणा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं था।
राजेंद्र राणा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में बतौर आजाद प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी उर्मिल ठाकुर और कांग्रेस प्रत्याशी अनीता वर्मा को हराया था। लेकिन, दो साल तक विधायक रहने के बाद 2014 में इस्तीफा देकर राणा ने हमीरपुर संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन, वह भाजपा प्रत्याशी अनुराग ठाकुर से पराजित हो गए। 2014 के उपचुनाव में भाजपा ने यहां से पूर्व मंत्री ठाकुर जगदेव चंद के पुत्र नरेंद्र ठाकुर को टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की। लेकिन, 2017 के चुनावों में पार्टी हाईकमान ने धूमल को सुजानपुर और सुजानपुर से नरेंद्र ठाकुर को हमीरपुर से टिकट दिया। चुनावों के बिल्कुल निकट टिकट मिलने और सुजानपुर से कोई तैयारी न होने व प्रदेश में चुनाव प्रचार का जिम्मा होने के कारण धूमल यहां राजेंद्र राणा से 1919 मतों से हार गए। अब इस बार राजेंद्र राणा का मुकाबला सेना मेडल कैप्टन रणजीत सिंह से होगा। अब लोगों की नजर चुनावी नतीजों पर टिकी है।
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सुजानपुर सीट से भाजपा को चाहिए जिताऊ प्रत्याशी
राजनीतिक जानकार यह कह रहे हैं कि सुजानपुर सीट से राजेंद्र राणा के खिलाफ चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए भाजपा में जिताऊ प्रत्याशी चाहिए। लेकिन, प्रत्याशी को नजरअंदाज करने की बातें 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मंडी संसदीय सीट में सुनने को मिली थीं, क्योंकि उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में पंडित रामस्वरूप को टिकट मिला था। तब कांग्रेस समेत भाजपा भी यह मानने को तैयार नहीं थी कि रामस्वरूप मंडी सीट जीत सकते हैं। लेकिन, रामस्वरूप ने एक बार नहीं बल्कि मंडी संसदीय सीट से लगातार दो बार लोकसभा का चुनाव जीतकर सबको हैरान किया था।
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वह इससे पूर्व सुजानपुर मंडल के अध्यक्ष और मंडल संयोजक व हमीरपुर भाजपा के उपाध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। सुजानपुर चुनावी हलके में पूर्व सैनिकों और सैनिकों की संख्या छह हजार से अधिक है। पार्टी हाईकमान ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों के वोट साधने के लिए यहां से कैप्टन रणजीत सिंह को टिकट दिया है। वहीं, दूसरा कारण यह भी है कि सुजानपुर से धूमल के अलावा कोई भी व्यक्ति राजेंद्र राणा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं था।
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राजेंद्र राणा ने 2012 के विधानसभा चुनाव में बतौर आजाद प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी उर्मिल ठाकुर और कांग्रेस प्रत्याशी अनीता वर्मा को हराया था। लेकिन, दो साल तक विधायक रहने के बाद 2014 में इस्तीफा देकर राणा ने हमीरपुर संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन, वह भाजपा प्रत्याशी अनुराग ठाकुर से पराजित हो गए। 2014 के उपचुनाव में भाजपा ने यहां से पूर्व मंत्री ठाकुर जगदेव चंद के पुत्र नरेंद्र ठाकुर को टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की। लेकिन, 2017 के चुनावों में पार्टी हाईकमान ने धूमल को सुजानपुर और सुजानपुर से नरेंद्र ठाकुर को हमीरपुर से टिकट दिया। चुनावों के बिल्कुल निकट टिकट मिलने और सुजानपुर से कोई तैयारी न होने व प्रदेश में चुनाव प्रचार का जिम्मा होने के कारण धूमल यहां राजेंद्र राणा से 1919 मतों से हार गए। अब इस बार राजेंद्र राणा का मुकाबला सेना मेडल कैप्टन रणजीत सिंह से होगा। अब लोगों की नजर चुनावी नतीजों पर टिकी है।
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सुजानपुर सीट से भाजपा को चाहिए जिताऊ प्रत्याशी
राजनीतिक जानकार यह कह रहे हैं कि सुजानपुर सीट से राजेंद्र राणा के खिलाफ चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए भाजपा में जिताऊ प्रत्याशी चाहिए। लेकिन, प्रत्याशी को नजरअंदाज करने की बातें 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान मंडी संसदीय सीट में सुनने को मिली थीं, क्योंकि उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में पंडित रामस्वरूप को टिकट मिला था। तब कांग्रेस समेत भाजपा भी यह मानने को तैयार नहीं थी कि रामस्वरूप मंडी सीट जीत सकते हैं। लेकिन, रामस्वरूप ने एक बार नहीं बल्कि मंडी संसदीय सीट से लगातार दो बार लोकसभा का चुनाव जीतकर सबको हैरान किया था।