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लंबेहड़ा में यूरेनियम को देखने को लोगों का लगा जमावड़ा
Hamirpur
Updated Thu, 25 Apr 2013 02:38 PM IST
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हमीरपुर। ग्राम पंचायत ख्याह के लंबेहड़ा गांव में यूरेनियम जैसा काला पत्थर निकलनेे से ग्रामीण हैरान है। आसपास के गांवों के लोगों की काफी भीड़ पत्थर देखने को पहुंच रही है। अजीत सिंह के घर में पत्थर को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। ग्राम पंचायत ख्याह के लंबेहड़ा गांव में मनरेगा टैंक की खुदाई के दौरान यूरेनियम जैसा काला पत्थर निकला है। परिवार में दहशत का माहौल है। हालांकि पुख्ता तौर पर पत्थर के यूरेनियम होने की बात नहीं कही जा रही है। गांव के दौरे के दौरान पाया गया कि पत्थर को देखने के लिए आसपास के गांवों के ग्रामीण पहुंच रहे हैं।
टैंक की खुदाई के दौरान मौके पर पहुंचे बीडीओ और एसडीएम ने खुदवाई का काम रुकवा दिया है। मौजूद ग्रामीणों जोग्रिंद्र सिंह, अजीत सिंह, लक्की, प्रताप चंद, मान चंद, राज कुमार, गायत्री देवी, प्रवीण कुमार, बबिता, वीना देवी, मनोज कुमार, अरविंद, गरीब दास, सतीश कुमार, रमेश चंद, रवि कुमार ने बताया कि सन 1981 में परमाणु ऊर्जा विभाग ने यूरेनियम के अवशेष निकाले थे। विभाग करीब 15 वर्षों तक तीन सुरंगों में खुदाई कर यूरेनियम को निकाला था लेकिन 90 के दशक में कार्य बंद कर दिया। परमाणु ऊर्जा विभाग ने यूरेनियम को निकालने के लिए प्रयोगशाला भी स्थापित की। हालांकि यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी गांव में कई टैंक खोदे गए हैं लेकिन किसी भी टैंक में तथाकथित यूरेनियम वाले काले पत्थर देखने को नहीं मिले हैं। ग्रामीण यह सब देख हैरान है।
बाक्स-
हमीरपुर। टैंक की खुदाई से निकले यूरेनियम जैसे काले पत्थर के बारे में अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। ग्रामीण और विभागीय अधिकारी भी काले पत्थर के यूरेनियम होने की बात से एकमत नहीं है। फिलहाल एसडीएम हमीरपुर ने काले पत्थर के सैंपल जांच के लिए बैंगलोर प्रयोग शाला में भेजे हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उपायुक्त आशीष सिंहमार ने बताया कि एसडीएम, खंड विकास अधिकारी तथा खनन अधिकारी ने मौके का जायजा लेकर सैंपल ले लिए हैं जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
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टैंक की खुदाई के दौरान मौके पर पहुंचे बीडीओ और एसडीएम ने खुदवाई का काम रुकवा दिया है। मौजूद ग्रामीणों जोग्रिंद्र सिंह, अजीत सिंह, लक्की, प्रताप चंद, मान चंद, राज कुमार, गायत्री देवी, प्रवीण कुमार, बबिता, वीना देवी, मनोज कुमार, अरविंद, गरीब दास, सतीश कुमार, रमेश चंद, रवि कुमार ने बताया कि सन 1981 में परमाणु ऊर्जा विभाग ने यूरेनियम के अवशेष निकाले थे। विभाग करीब 15 वर्षों तक तीन सुरंगों में खुदाई कर यूरेनियम को निकाला था लेकिन 90 के दशक में कार्य बंद कर दिया। परमाणु ऊर्जा विभाग ने यूरेनियम को निकालने के लिए प्रयोगशाला भी स्थापित की। हालांकि यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी गांव में कई टैंक खोदे गए हैं लेकिन किसी भी टैंक में तथाकथित यूरेनियम वाले काले पत्थर देखने को नहीं मिले हैं। ग्रामीण यह सब देख हैरान है।
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हमीरपुर। टैंक की खुदाई से निकले यूरेनियम जैसे काले पत्थर के बारे में अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। ग्रामीण और विभागीय अधिकारी भी काले पत्थर के यूरेनियम होने की बात से एकमत नहीं है। फिलहाल एसडीएम हमीरपुर ने काले पत्थर के सैंपल जांच के लिए बैंगलोर प्रयोग शाला में भेजे हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने पर ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उपायुक्त आशीष सिंहमार ने बताया कि एसडीएम, खंड विकास अधिकारी तथा खनन अधिकारी ने मौके का जायजा लेकर सैंपल ले लिए हैं जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
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