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तुलसी, अश्वगंधा की खेती करने पर मिलेगा 70 फीसदी अनुदान
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रंगस (नादौन)। उपमंडल की ग्राम पंचायत जोलसप्पड़ के गांव सनकर के किसानों ने शुक्रवार को औषधीय खेती करने की तकनीक सीखी। शिविर में औषधीय खेती करने के बारे में स्टेट मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के जिला नोडल अधिकारी डॉ. रविंद्र शर्मा ने बताया कि बोर्ड औषधीय खेती करने के लिए किसानों को सब्सिडी देता है तथा इसकी खेती करने से पूर्व किसानों को बाकायदा खेती करने की तकनीक के बारे में प्रशिक्षण भी प्रदेश सरकार की ओर से दिया जाता है। तीन दिन का प्रशिक्षण राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी जोगिंद्रनगर जिला मंडी में दिया जाता है। इसके लिए किसानों को आने जाने का खर्च सरकार की ओर से दिया जाता है तथा वहां पर रहने और खाने पीने का खर्च भी प्रदेश सरकार की ओर से वहन किया जाता है।
इसलिए अधिक से अधिक किसानों को कॉमर्शियल स्तर पर औषधीय पौधों की खेती करनी चाहिए। अब परंपरागत खेती से आय नहीं हो पाती, जिससे किसान आर्थिक रूप से कमजोर ही रह जाता है। इसलिए खेती का ट्रेंड अब बदल कर प्रमोशनल खेती करने में ही लाभ हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि स्टेट मेडिसिनल प्लांट बोर्ड की ओर से जिला हमीरपुर के लिए तुलसी, अश्वगंधा तथा सुगंध वाला की खेती करने के लिए 60 से 70 फीसदी अनुदान दिया जाता है। इसके लिए किसान एक क्लस्टर के रूप में भी औषधीय पौधों की खेती कर सकते हैं। इसके लिए कोई ज्यादा औपचारिकताएं नहीं हैं। केवल एक जमीन का पर्चा, ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र तथा एक हलफनामा देना होता है कि आपने इस भूमि पर तत्कालीन समय पर अन्य कोई भी सब्सिडी नहीं ले रखी है। इस मौके पर सूबेदार बाल सिंह, बुद्धि सिंह, कांता देवी, सिमरो देवी, आशा देवी तथा केसरी देवी सहित 30 किसान उपस्थित रहे।
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इसलिए अधिक से अधिक किसानों को कॉमर्शियल स्तर पर औषधीय पौधों की खेती करनी चाहिए। अब परंपरागत खेती से आय नहीं हो पाती, जिससे किसान आर्थिक रूप से कमजोर ही रह जाता है। इसलिए खेती का ट्रेंड अब बदल कर प्रमोशनल खेती करने में ही लाभ हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि स्टेट मेडिसिनल प्लांट बोर्ड की ओर से जिला हमीरपुर के लिए तुलसी, अश्वगंधा तथा सुगंध वाला की खेती करने के लिए 60 से 70 फीसदी अनुदान दिया जाता है। इसके लिए किसान एक क्लस्टर के रूप में भी औषधीय पौधों की खेती कर सकते हैं। इसके लिए कोई ज्यादा औपचारिकताएं नहीं हैं। केवल एक जमीन का पर्चा, ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र तथा एक हलफनामा देना होता है कि आपने इस भूमि पर तत्कालीन समय पर अन्य कोई भी सब्सिडी नहीं ले रखी है। इस मौके पर सूबेदार बाल सिंह, बुद्धि सिंह, कांता देवी, सिमरो देवी, आशा देवी तथा केसरी देवी सहित 30 किसान उपस्थित रहे।
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