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सिर्फ नाम का मेडिकल कॉलेज, नहीं स्वाइन फ्लू टेस्ट की सुविधा नहीं
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हमीरपुर। डॉ. राधा कृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर महज नाम का ही रह गया है। इस मेडिकल कॉलेज को शुरू हुए एक साल हो चुका है लेकिन, अस्पताल में स्वाइन फ्लू के टेस्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू के आने वाले संदिग्ध मरीजों को टेस्ट के लिए मेडिकल कॉलेज टांडा और आईजीएमसी शिमला रेफर किया जा रहा है। हालांकि, प्रदेश में अलर्ट के बाद मेडिकल कालेज हमीरपुर में आइसोलेशन वार्ड और टेमीफ्लू दवा उपलब्ध करवा दी गई है। लेकिन, जब टेस्ट ही नहीं हो रहे तो दवा किस काम की? मंगलवार को मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में दाखिल स्वाइन फ्लू के एक संदिग्ध को टेस्ट सुविधा न होने के कारण मेडिकल कॉलेज टांडा रेफर करना पड़ा।
वहीं, अस्पताल के कमरा नंबर पांच को आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, जहां पर संक्रमित मरीजों को उपचाराधीन किया जाता है। वहीं, अस्पताल में टेमीफ्लू की दवाई तो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन टेस्ट सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट जारी किया है। मेडिकल कॉलेज होने के कारण अस्पताल में स्वाइन फ्लू के टेस्ट की सुविधा मिलनी चाहिए ताकि, लोगों का समय रहते टेस्ट हो सके और उनका समय पर उपचार शुरू हो चुके। जिले में स्वाइन फ्लू से भोरंज की महिला की 25 जनवरी को टांडा में मौत हो चुकी है। वहीं मंगलवार को दूसरा संदिग्ध मामला टांडा रेफर किया गया है। ऐसे में यदि मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में टेस्ट और वेंटिलेशन की सुविधा उपलब्ध हो तो मरीजों का समय पर उपचार शुरू हो सकता है। इस संबंध में एमएस डॉ. अनिल वर्मा का कहना है कि अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड और टेमीफ्लू दवा उपलब्ध है, लेकिन टेस्ट सुविधा नहीं है। टेस्ट के लिए मरीजों को टांडा रेफर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है।
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वहीं, अस्पताल के कमरा नंबर पांच को आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, जहां पर संक्रमित मरीजों को उपचाराधीन किया जाता है। वहीं, अस्पताल में टेमीफ्लू की दवाई तो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन टेस्ट सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट जारी किया है। मेडिकल कॉलेज होने के कारण अस्पताल में स्वाइन फ्लू के टेस्ट की सुविधा मिलनी चाहिए ताकि, लोगों का समय रहते टेस्ट हो सके और उनका समय पर उपचार शुरू हो चुके। जिले में स्वाइन फ्लू से भोरंज की महिला की 25 जनवरी को टांडा में मौत हो चुकी है। वहीं मंगलवार को दूसरा संदिग्ध मामला टांडा रेफर किया गया है। ऐसे में यदि मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में टेस्ट और वेंटिलेशन की सुविधा उपलब्ध हो तो मरीजों का समय पर उपचार शुरू हो सकता है। इस संबंध में एमएस डॉ. अनिल वर्मा का कहना है कि अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड और टेमीफ्लू दवा उपलब्ध है, लेकिन टेस्ट सुविधा नहीं है। टेस्ट के लिए मरीजों को टांडा रेफर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है।
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