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हमीरपुर की अनदेखी, नहीं मिला कोई मंत्री पद
Updated Wed, 27 Dec 2017 11:01 PM IST
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हमीरपुर। सूबे में शुरू से सक्रिय राजनीति में रहने वाला जिला हमीरपुर इस बार अनदेखी का शिकार हो गया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार में जिले से एक भी मंत्री नहीं बना है। इससे पूर्व वीरभूमि के नाम से पहचाने जाने वाले हमीरपुर जिला ने मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों सरकारों में कैबिनेट मंत्री दिए हैं। वहीं भाजपा सरकार में दूसरे मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी हमीरपुर जिला को प्राप्त है। प्रो. प्रेम कुमार धूमल हमीरपुर जिला की बमसन सीट से तीन बार और चौथी बार हमीरपुर से चुनाव जीते हैं। धूमल 1998 से 2003 और 2007 से 2012 तक प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं।
धूमल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में जिले से दो मर्तबा मंत्री और एक बार मुख्य संसदीय सचिव भी रहे। इस बार भोरंज से कमलेश कुमारी और हमीरपुर से नरेंद्र ठाकुर के भारी मतों के अंतर से चुनाव जीतने के बावजूद मंत्रिमंडल में तरजीह नहीं दी गई। ठाकुर जगदेव चंद को बीजेपी का संस्थापक माना जाता रहा है। वह बीजेपी सरकार में हमीरपुर से पहले परिवहन मंत्री रहे हैं। इसके साथ ही ईश्वर दास धीमान भोरंज विधानसभा क्षेत्र से दो बार शिक्षा मंत्री रहे हैं। धीमान ने उस मिथक को भी तोड़ा जिसमें कहा जाता रहा है कि जो एक बार शिक्षा मंत्री बना वह दूसरी बार चुनाव नहीं जीता। धीमान पूर्व में विस क्षेत्र मेवा से लगातार छह बार चुनाव जीते हैं। दिसंबर 2016 में बीमारी के कारण उनका निधन हुआ था। वहीं कांग्रेस में मेवा से धर्म सिंह चौधरी और नादौन विधानसभा क्षेत्र से नारायण चंद पराशर मंत्री रहे हैं। धर्म सिंह चौधरी राजस्व मंत्री, तो नारायण चंद पराशर वीरभद्र सरकार में शिक्षा मंत्री रहे हैं। इसके अलावा पराशर लोकसभा के सदस्य भी रहे। कांग्रेस सरकार में हमीरपुर जिला से तीसरे मंत्री रणजीत सिंह वर्मा रहे हैं। वर्मा के पास उद्योग विभाग रहा है। हमीरपुर के लोगों सुनील शर्मा, अजय ठाकुर, विनोद वर्मा, राहुल शर्मा और राकेश सिंह ने कहा कि सरकार में मंत्री पद न मिलने से जिला के लोगों में मायूसी है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारों में जिला से कोई न कोई मंत्री रहा है।
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धूमल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में जिले से दो मर्तबा मंत्री और एक बार मुख्य संसदीय सचिव भी रहे। इस बार भोरंज से कमलेश कुमारी और हमीरपुर से नरेंद्र ठाकुर के भारी मतों के अंतर से चुनाव जीतने के बावजूद मंत्रिमंडल में तरजीह नहीं दी गई। ठाकुर जगदेव चंद को बीजेपी का संस्थापक माना जाता रहा है। वह बीजेपी सरकार में हमीरपुर से पहले परिवहन मंत्री रहे हैं। इसके साथ ही ईश्वर दास धीमान भोरंज विधानसभा क्षेत्र से दो बार शिक्षा मंत्री रहे हैं। धीमान ने उस मिथक को भी तोड़ा जिसमें कहा जाता रहा है कि जो एक बार शिक्षा मंत्री बना वह दूसरी बार चुनाव नहीं जीता। धीमान पूर्व में विस क्षेत्र मेवा से लगातार छह बार चुनाव जीते हैं। दिसंबर 2016 में बीमारी के कारण उनका निधन हुआ था। वहीं कांग्रेस में मेवा से धर्म सिंह चौधरी और नादौन विधानसभा क्षेत्र से नारायण चंद पराशर मंत्री रहे हैं। धर्म सिंह चौधरी राजस्व मंत्री, तो नारायण चंद पराशर वीरभद्र सरकार में शिक्षा मंत्री रहे हैं। इसके अलावा पराशर लोकसभा के सदस्य भी रहे। कांग्रेस सरकार में हमीरपुर जिला से तीसरे मंत्री रणजीत सिंह वर्मा रहे हैं। वर्मा के पास उद्योग विभाग रहा है। हमीरपुर के लोगों सुनील शर्मा, अजय ठाकुर, विनोद वर्मा, राहुल शर्मा और राकेश सिंह ने कहा कि सरकार में मंत्री पद न मिलने से जिला के लोगों में मायूसी है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारों में जिला से कोई न कोई मंत्री रहा है।
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