Himachal: मानसून में जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश, मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ की बैठक
मुख्य सचिव केके पंत ने भारी वर्षा, अचानक बाढ़, भूस्खलन या बादल फटने जैसी किसी भी आपात स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने को कहा।
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मुख्य सचिव केके पंत ने सभी उपायुक्तों को मानसून के चलते उच्च स्तर की तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने भारी वर्षा, अचानक बाढ़, भूस्खलन या बादल फटने जैसी किसी भी आपात स्थिति पर तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रहने पर जोर दिया। संवेदनशील स्थानों की बारीकी से निगरानी करने और राज्य तथा सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा। हिमाचल प्रदेश में मानसून की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। यह बैठक शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश सचिवालय से वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। इसमें प्रदेश के सभी उपायुक्त शामिल हुए।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने राज्य में मानसून की समग्र स्थिति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने वर्षा जनित घटनाओं, राहत एवं आवश्यक सेवाओं की बहाली की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सड़क संपर्क, बिजली और पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ जिला प्रशासनों की तैयारियों का भी विस्तृत जायजा लिया। उपायुक्तों ने अपने-अपने जिलों की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने मानसून संबंधी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों से भी अवगत कराया। इसके अलावा, अन्य मानसून संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए भी तैयारी पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने उपायुक्तों को बाधित आवश्यक सेवाओं की समय पर बहाली सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इनमें सड़कें, बिजली, पेयजल आपूर्ति और संचार नेटवर्क शामिल हैं। उन्होंने मौसम पूर्वानुमानों और सार्वजनिक सलाहों के समय पर प्रसार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य जन जागरूकता बढ़ाना और जान-माल के जोखिम को कम करना है। राज्य सरकार जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वह मानसून संबंधी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए प्रयासरत है। यह सभी विभागों और जिला प्रशासनों के समन्वित प्रयासों से किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य जन-धन की हानि को न्यूनतम रखना है।
जल स्रोतों के बैहतर संरक्षण पर सम्मानित होंगी पंचायतें
जल स्रोतों के संरक्षण के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाली पंचायतों को सम्मानित किया जाएगा। सरकार पारंपरिक स्रोतों के पुनर्जीवन पर भी विशेष ध्यान देगी। जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव एवं राज्य नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक जैन ने जिला उपायुक्तों, जल शक्ति विभाग के अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों को जल संरक्षण अभियान को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बुधवार को आयोजित बैठक में कहा कि यह अभियान सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि पंचायतों, नगर निकायों, महिला मंडलों, स्वयं सहायता समूहों, युवा क्लबों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों को भी इससे जोड़ा जाएगा। गांवों में वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और स्थानीय जरूरतों के अनुसार छोटे-छोटे जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
साथ ही बावड़ियों, कूहलों और पोखरों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैच द रेन-2026 अभियान के तहत जिलावार प्रगति की भी समीक्षा भी की। प्रदेश में पानी बचाने और जल स्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने जल संरक्षण अभियान तेज किया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गांवों और शहरों में लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक किया जाए। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने, सूख रहे प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और नए जल संरक्षण कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि लोगों की भागीदारी से ही पानी की कमी की समस्या का समाधान संभव है। सभी विभाग मिलकर अभियान को सफल बनाने और हर स्तर पर जल संरक्षण को बढ़ावा देने का काम करेंगे।