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Chamba News: प्रदेश सरकार की नितियों के खिलाफ गरजे मजदूर

Wed, 15 Mar 2023 11:08 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Mar 2023 11:08 PM IST
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Workers roared against the policies of the state government
चंबा। उपायुक्त कार्यालय के बाहर सीटू ने बुधवार को प्रदर्शन किया। परियोजनाओं में मजदूरों के साथ हो रहे शोषण के विरोध में सीटू ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में हाइड्रो प्रोजेक्ट, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी, मनरेगा मजदूर और अन्य यूनियनें शामिल रहीं। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने कहा कि ठेका व्यवस्था ने मजदूरों को बंधुआ बना दिया है। चंबा में संचालित हाइड्रो प्रोजेक्ट में ठेकेदार अपनी मनमानी करके मजदूरों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। 15 साल से अधिक समय से काम कर रहे स्कीम वर्कर आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्करों को कोई भी सामाजिक सुरक्षा और पेंशन की व्यवस्था नहीं है। न ही न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इन कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने निर्माण में काम करने वाले मजदूरों को कल्याण बोर्ड से मिलने वाले लाभ को रोक दिया है। इससे मजदूरों को मिलने वाले लाभ जैसे इंडक्शन, टिफिन, वाशिंग मशीन, साइकिल आदि से लाभान्वित किया जाए।
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मनरेगा वर्कर को जो बोर्ड से बाहर निकालने का सरकार ने फैसला लिया है, वह मजदूर विरोधी है। मनरेगा में काम करने वाला व्यक्ति भी निर्माण का मजदूर है इसलिए मनरेगा वर्कर को बोर्ड से न हटाया जाए। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स जैसी नीति लाकर सरकार सरकारी संस्थाओं को कमजोर कर रही है। आउटसोर्स सिर्फ और सिर्फ ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने और मजदूरों के शोषण का ही एक तरीका है। चंबा जिले में वन विभाग के तहत काम करने वाले मजदूर जिनमें अधिकतर गरीब घरों से संबंध रखने वाले लोग हैं, वही इस नीति का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इन मजदूरों की दशा यह हो चुकी है कि एक साल से इन्हें मेहनताना नहीं मिल रहा है। विभाग के पास न तो इनका कोई रिकॉर्ड है और न ही इनके लिए मस्टररोल जारी किया जाता है। यदि सरकार जल्द इनकी स्थिति में सुधार नहीं करती है तो पूरे जिले के अंदर वन विभाग दैनिक वेतन भोगी मजदूरों को संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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इसी प्रथा का जीता जागता नमूना एनएचपीसी बैरा स्युल में देखने को मिला है। यहां ठेकेदार ने मनमर्जी से रिलीवर के नाम पर अतिरिक्त व्यक्ति को अन्य मजदूरों के मेहनताने के सहारे रखा है। इसमें पहले से काम कर रहे कामगार के मेहनताने से पैसा काट कर उस व्यक्ति को दिया जाएगा।
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