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Chamba News: सब्सिडी का पुल टूटा तो खेतों में बिखर गई भरोसे की धारा

Fri, 19 Jun 2026 10:17 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा Updated Fri, 19 Jun 2026 10:17 PM IST
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When the bridge of subsidy collapsed, the stream of trust scattered across the fields.
मक्की के बीज, एंटी-हेलनेट समेत कई योजनाओं पर सब्सिडी बंद होने से किसान-बागवान चिंतित
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बोले- सरकार के खेती को बढ़ावा देने के दावों के बीच सिमट रहीं जमीन स्तर पर सुविधाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में खेती और बागवानी से जुड़े किसानों का सरकारी योजनाओं पर भरोसा धीरे-धीरे कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। कभी खेती को सहारा देने वाली सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाएं अब एक-एक कर बंद हो रही हैं। इससे बढ़ती लागत के बीच किसानों और बागवानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालात यह हैं कि मक्की के बीज से लेकर एंटी-हेलनेट जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं पर रोक लगने से कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

किसानों में सुधीर कुमार, कमल कुमार, संजीव कुमार, जगदीश कुमार, दीपक कुमार और महिंद्र कुमार ने बताया कि पहले मक्की के बीज पर मिलने वाली सब्सिडी उन्हें खेती के लिए प्रोत्साहित करती थी। अब यह सुविधा बंद हो चुकी है। बागवानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसलों की सुरक्षा के लिए एंटी-हेलनेट पर मिलने वाली सब्सिडी भी समाप्त हो गई है। इसके अलावा कृषि और बागवानी से जुड़ीं कई अन्य योजनाएं भी या तो बंद कर दी गई हैं या उनका दायरा काफी सीमित कर दिया गया है। एक तरफ सरकार एक ओर खेती और बागवानी को बढ़ावा देने तथा युवाओं को कृषि क्षेत्र से जोड़ने की बात करती है जबकि दूसरी ओर जमीनी स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं लगातार कम होती जा रही हैं। उनका मानना है कि बढ़ती लागत और घटती सरकारी सहायता के कारण खेती-बागवानी पहले की तुलना में कम लाभकारी होती जा रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बंद की गई योजनाओं को दोबारा शुरू किया जाए और बीज, पौधों, एंटी-हेलनेट व अन्य कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बहाल की जाए जिससे किसान और बागवान आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें और खेती-बागवानी के प्रति उनका विश्वास बना रहे। उधर, कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मक्की के बीज में मिलने वाली सब्सिडी सरकार की ओर से खत्म कर दी गई है।
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