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Chamba News: चंबा में खेल प्रतिभाओं को तराशने वाला कोई नहीं
Fri, 28 Aug 2026 10:24 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 28 Aug 2026 10:24 PM IST
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हॉकी, फुटबाल, वॉलीबाल और बास्केटबाल के खिलाड़ी छह साल से विशेषज्ञ प्रशिक्षण से महरूम
छह साल से बैडमिंटन को छोड़कर सभी खेलों में कोच के पद खाली
पंकज सलारिया
चंबा। जिले में खेलेगा युवा, जीतेगा युवा के बड़े-बड़े प्रशासनिक दावे बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षकों की भारी किल्लत के आगे घुटने टेक रहे हैं।
जिले में बैडमिंटन को छोड़ दें तो हॉकी, फुटबाल, वॉलीबाल और बास्केटबाल जैसे प्रमुख और लोकप्रिय खेलों के लिए एक भी नियमित प्रशिक्षक तैनात नहीं है। छह साल से इन खेलों में कोच का पद खाली है। इसके चलते अपनी प्रतिभा को तराशने में जुटे सैकड़ों युवा खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
खेल मैदानों में खिलाड़ी सुबह-शाम जमकर पसीना बहा रहे हैं लेकिन खेल की बारीक रणनीतियों और तकनीकी खामियों को सुधारने के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं है। इसका सीधा असर जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों पर पड़ रहा है। विभाग की ओर से हर बार पत्राचार के माध्यम से सरकार को खाली पदों का ब्योरा भेजा जाता है मगर फाइलों की इस कागजी दौड़ में अभी तक कोई ठोस हल नहीं निकल सका है।
सरकार एक तरफ युवाओं को नशे से दूर रखकर खेलों से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर चंबा की खेल प्रतिभाओं को बिना गुरु के मैदान में उतरना पड़ रहा है। मार्गदर्शन न मिलने के कारण कई होनहार खिलाड़ी या तो दूसरे जिलों का रुख करने को मजबूर हैं या फिर अपनी जेब ढीली कर निजी कोचिंग सेंटर जॉइन कर रहे हैं।
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चंबा जिले में इस समय केवल बैडमिंटन खेल के प्रशिक्षक ही सेवाएं दे रहे हैं। अन्य प्रमुख खेलों के रिक्त पदों के संदर्भ में विभाग की ओर से समय-समय पर उच्च अधिकारियों और सरकार को अवगत करवाया जाता रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही नए प्रशिक्षकों की तैनाती की जाएगी। - रूपेश कुमार, जिला खेल अधिकारी, चंबा
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छह साल से बैडमिंटन को छोड़कर सभी खेलों में कोच के पद खाली
पंकज सलारिया
चंबा। जिले में खेलेगा युवा, जीतेगा युवा के बड़े-बड़े प्रशासनिक दावे बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षकों की भारी किल्लत के आगे घुटने टेक रहे हैं।
जिले में बैडमिंटन को छोड़ दें तो हॉकी, फुटबाल, वॉलीबाल और बास्केटबाल जैसे प्रमुख और लोकप्रिय खेलों के लिए एक भी नियमित प्रशिक्षक तैनात नहीं है। छह साल से इन खेलों में कोच का पद खाली है। इसके चलते अपनी प्रतिभा को तराशने में जुटे सैकड़ों युवा खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया है।
खेल मैदानों में खिलाड़ी सुबह-शाम जमकर पसीना बहा रहे हैं लेकिन खेल की बारीक रणनीतियों और तकनीकी खामियों को सुधारने के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं है। इसका सीधा असर जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों पर पड़ रहा है। विभाग की ओर से हर बार पत्राचार के माध्यम से सरकार को खाली पदों का ब्योरा भेजा जाता है मगर फाइलों की इस कागजी दौड़ में अभी तक कोई ठोस हल नहीं निकल सका है।
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सरकार एक तरफ युवाओं को नशे से दूर रखकर खेलों से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर चंबा की खेल प्रतिभाओं को बिना गुरु के मैदान में उतरना पड़ रहा है। मार्गदर्शन न मिलने के कारण कई होनहार खिलाड़ी या तो दूसरे जिलों का रुख करने को मजबूर हैं या फिर अपनी जेब ढीली कर निजी कोचिंग सेंटर जॉइन कर रहे हैं।
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चंबा जिले में इस समय केवल बैडमिंटन खेल के प्रशिक्षक ही सेवाएं दे रहे हैं। अन्य प्रमुख खेलों के रिक्त पदों के संदर्भ में विभाग की ओर से समय-समय पर उच्च अधिकारियों और सरकार को अवगत करवाया जाता रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही नए प्रशिक्षकों की तैनाती की जाएगी। - रूपेश कुमार, जिला खेल अधिकारी, चंबा