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Chamba News: खड्डी की खनक से फिर संवरेंगे चंबा शॉल के धागे
Thu, 20 Aug 2026 11:06 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:06 PM IST
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छतराड़ी में एक साल का प्रशिक्षण केंद्र शुरू, 10 महिलाएं सीख रहीं पारंपरिक बुनाई
महिलाओं को घर-द्वार पर रोजगार से जोड़ने के लिए पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चंबा की पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी पारंपरिक खड्डी पर शॉल बुनाई की कला को बचाने की पहल शुरू हो गई है।
लुप्त होती इस कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा ने जगत पंचायत के छतराड़ी में एक वर्षीय प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है। केंद्र में 10 महिलाओं ने प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया है।
इस पहल की खास बात यह है कि महिलाओं को केवल पारंपरिक चंबा शॉल बुनने का प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि प्रशिक्षण से जुड़े कार्यों के लिए मेहनताना भी मिलेगा। महिलाओं को हुनर सीखने के साथ आर्थिक संबल भी मिलेगा। एक साल के दौरान महिलाएं खड्डी पर शॉल तैयार करने की बारीकियां सीखेंगी और आगे चलकर इसी हुनर को स्वरोजगार का माध्यम बना सकेंगी।
प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षकों को 2400 रुपये प्रतिमाह और शिक्षक को 7000 रुपये प्रतिमाह मेहनताना दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
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आधुनिक मशीनों के दौर में हाथ से खड्डी पर शॉल बुनने की कला धीरे-धीरे सिमट रही है। ऐसे में यह केंद्र चंबा की पारंपरिक बुनाई को संरक्षण देने की दिशा में अहम कदम है।
हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा के प्रभारी शीतल कुमार ने बताया कि केंद्र का उद्देश्य लुप्त होती पारंपरिक संस्कृति को बचाने के साथ महिलाओं और युवतियों को रोजगार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घर-द्वार पर रोजगार उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। छतराड़ी के बाद होली क्षेत्र में भी इसी तरह का प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की तैयारी है।
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महिलाओं को घर-द्वार पर रोजगार से जोड़ने के लिए पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चंबा की पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी पारंपरिक खड्डी पर शॉल बुनाई की कला को बचाने की पहल शुरू हो गई है।
लुप्त होती इस कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा ने जगत पंचायत के छतराड़ी में एक वर्षीय प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है। केंद्र में 10 महिलाओं ने प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया है।
इस पहल की खास बात यह है कि महिलाओं को केवल पारंपरिक चंबा शॉल बुनने का प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि प्रशिक्षण से जुड़े कार्यों के लिए मेहनताना भी मिलेगा। महिलाओं को हुनर सीखने के साथ आर्थिक संबल भी मिलेगा। एक साल के दौरान महिलाएं खड्डी पर शॉल तैयार करने की बारीकियां सीखेंगी और आगे चलकर इसी हुनर को स्वरोजगार का माध्यम बना सकेंगी।
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प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षकों को 2400 रुपये प्रतिमाह और शिक्षक को 7000 रुपये प्रतिमाह मेहनताना दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
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आधुनिक मशीनों के दौर में हाथ से खड्डी पर शॉल बुनने की कला धीरे-धीरे सिमट रही है। ऐसे में यह केंद्र चंबा की पारंपरिक बुनाई को संरक्षण देने की दिशा में अहम कदम है।
हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट कारपोरेशन चंबा के प्रभारी शीतल कुमार ने बताया कि केंद्र का उद्देश्य लुप्त होती पारंपरिक संस्कृति को बचाने के साथ महिलाओं और युवतियों को रोजगार से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घर-द्वार पर रोजगार उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। छतराड़ी के बाद होली क्षेत्र में भी इसी तरह का प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की तैयारी है।