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Chamba News: डाकघर में ज्यादा ब्याज मिलने का झांसा देकर छह लाख रुपये ऐंठने वाला भेजा जेल
Fri, 19 Jan 2024 10:48 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 19 Jan 2024 10:48 PM IST
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चंबा। बैंकों के बजाय डाक विभाग में ब्याज दर अधिक होने का झांसा देकर छह लाख की एवज में दिए गए चेक बाउंस होने पर अदालत ने दोषी को दो साल साधारण कारावास और नौ लाख 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चंबा सुभाष चंद्र भसीन की अदालत ने सुनाया। बैंकों के बजाय डाकघर में ब्याज दर अधिक होने का झांसा देकर आरोपी ने अपने गांव के व्यक्ति से दिसंबर 2017 में छह लाख रुपये लिए थे। उसने पैसे डाकघर में जमा करवाने के बजाय अपने उपयोग के लिए ही खर्च कर दिए। कुछ समय बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी से डाकघर की पासबुक मांगी तो इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। व्यक्ति ने आरोपी से पैसे वापस मांगे तो उसने इसके लिए तीन माह की मोहलत मांगी। इस अवधि के दौरान भी उसने पैसे वापस नहीं किए। काफी समय बीतने के बाद भी पैसे न मिलने के साथ आरोपी ने व्यक्ति का फोन उठाना भी बंद कर दिया। व्यक्ति ने आरोपी की तलाश की और पैसे लौटाने के लिए कहा तो आरोपी टाल-मटोल करने लगा। इस पर व्यक्ति ने आरोपी की ओर से दिए चेक बैंक में लगा दिए। उसके खाते में पैसे न होने पर चेक बाउंस हो गया।
ऋण देने वाले व्यक्ति ने आरोपी के बैंक खाते में पैसे न होने पर चेक बाउंस होने की बताई। इस पर आरोपी बहसबाजी करने लगा। बहरहाल, व्यक्ति ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर की। मामले के तहत आखिरकार मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को दो वर्ष का साधारण कारावास और 9 लाख 20 हजार रुपये अदा करने का फैसला सुनाया।
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चंबा सुभाष चंद्र भसीन की अदालत ने सुनाया। बैंकों के बजाय डाकघर में ब्याज दर अधिक होने का झांसा देकर आरोपी ने अपने गांव के व्यक्ति से दिसंबर 2017 में छह लाख रुपये लिए थे। उसने पैसे डाकघर में जमा करवाने के बजाय अपने उपयोग के लिए ही खर्च कर दिए। कुछ समय बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी से डाकघर की पासबुक मांगी तो इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। व्यक्ति ने आरोपी से पैसे वापस मांगे तो उसने इसके लिए तीन माह की मोहलत मांगी। इस अवधि के दौरान भी उसने पैसे वापस नहीं किए। काफी समय बीतने के बाद भी पैसे न मिलने के साथ आरोपी ने व्यक्ति का फोन उठाना भी बंद कर दिया। व्यक्ति ने आरोपी की तलाश की और पैसे लौटाने के लिए कहा तो आरोपी टाल-मटोल करने लगा। इस पर व्यक्ति ने आरोपी की ओर से दिए चेक बैंक में लगा दिए। उसके खाते में पैसे न होने पर चेक बाउंस हो गया।
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ऋण देने वाले व्यक्ति ने आरोपी के बैंक खाते में पैसे न होने पर चेक बाउंस होने की बताई। इस पर आरोपी बहसबाजी करने लगा। बहरहाल, व्यक्ति ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर की। मामले के तहत आखिरकार मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को दो वर्ष का साधारण कारावास और 9 लाख 20 हजार रुपये अदा करने का फैसला सुनाया।
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