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Chamba News: मिंजर मेले की तैयारियों को लेकर मिंजर बनाने में जुटा मिर्जा परिवार
Mon, 20 Jul 2026 11:07 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 20 Jul 2026 11:07 PM IST
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चंबा में मिंजर बनाने में जुटा मिर्जा परिवार।संवाद
भगवान रघुवीर और लक्ष्मी-नारायण को अर्पित की जाती है मिंजर अर्पित
राजाओं के समय की परंपरा आज भी कायम
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले की तैयारियों के बीच शहर का मिर्जा परिवार पारंपरिक मिंजर बनाने में जुटा है। सदियों से इस परंपरा का निर्वहन कर रहा यह परिवार आज भी पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
मिर्जा परिवार के मुखिया एजाज बेग मिर्जा ने बताया कि राजा पृथ्वी सिंह के शासनकाल से यह प्रथा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि मुगल दरबार से चंबा आए शफी बेग मिर्जा ने पारंपरिक धान की मिंजर के स्वरूप को जरी और सोने के तारों से तैयार कर आकर्षक रूप दिया और इसे राजा को भेंट किया। इस मिंजर को देखकर राजा अत्यंत प्रसन्न हुए। उनकी बनाई पहली जरी मिंजर भगवान रघुवीर और लक्ष्मी-नारायण को अर्पित की गई। तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। मिर्जा परिवार की ओर से तैयार की गई पहली जरी मिंजर भगवान रघुवीर और लक्ष्मी-नारायण को अर्पित की जाती है। परंपरा के अनुसार भगवान रघुवीर, लक्ष्मी-नारायण तथा तत्कालीन राजा को सत-लड़ी जरी मिंजर और रेशमी मिंजर अर्पित की जाती थी। वर्तमान समय में यह परंपरा चंबा की साझी सांस्कृतिक विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण मानी जाती है। वर्षों से खुशहाली और भाईचारे का प्रतीक मिंजर तैयार करने वाले एजाज बेग मिर्जा इस सेवा को ईश्वर की विशेष कृपा मानते हैं। परिवार के बुजुर्गों से मिली इस विरासत को नई पीढ़ी भी पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रही है। हर वर्ष मेले से पहले परिवार के सदस्य विशेष सावधानी और पारंपरिक विधि से मिंजर तैयार करते हैं, ताकि सदियों पुरानी इस सांस्कृतिक धरोहर की निरंतरता बनी रहे।
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राजाओं के समय की परंपरा आज भी कायम
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले की तैयारियों के बीच शहर का मिर्जा परिवार पारंपरिक मिंजर बनाने में जुटा है। सदियों से इस परंपरा का निर्वहन कर रहा यह परिवार आज भी पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
मिर्जा परिवार के मुखिया एजाज बेग मिर्जा ने बताया कि राजा पृथ्वी सिंह के शासनकाल से यह प्रथा चली आ रही है। उन्होंने बताया कि मुगल दरबार से चंबा आए शफी बेग मिर्जा ने पारंपरिक धान की मिंजर के स्वरूप को जरी और सोने के तारों से तैयार कर आकर्षक रूप दिया और इसे राजा को भेंट किया। इस मिंजर को देखकर राजा अत्यंत प्रसन्न हुए। उनकी बनाई पहली जरी मिंजर भगवान रघुवीर और लक्ष्मी-नारायण को अर्पित की गई। तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। मिर्जा परिवार की ओर से तैयार की गई पहली जरी मिंजर भगवान रघुवीर और लक्ष्मी-नारायण को अर्पित की जाती है। परंपरा के अनुसार भगवान रघुवीर, लक्ष्मी-नारायण तथा तत्कालीन राजा को सत-लड़ी जरी मिंजर और रेशमी मिंजर अर्पित की जाती थी। वर्तमान समय में यह परंपरा चंबा की साझी सांस्कृतिक विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण मानी जाती है। वर्षों से खुशहाली और भाईचारे का प्रतीक मिंजर तैयार करने वाले एजाज बेग मिर्जा इस सेवा को ईश्वर की विशेष कृपा मानते हैं। परिवार के बुजुर्गों से मिली इस विरासत को नई पीढ़ी भी पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रही है। हर वर्ष मेले से पहले परिवार के सदस्य विशेष सावधानी और पारंपरिक विधि से मिंजर तैयार करते हैं, ताकि सदियों पुरानी इस सांस्कृतिक धरोहर की निरंतरता बनी रहे।
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