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Chamba News: शाम चार बजे नागरिक अस्पताल सलूणी में लटक जाता है ताला
Sun, 26 Oct 2025 06:30 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 26 Oct 2025 06:30 AM IST
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सलूणी (चंबा)। नागरिक अस्पताल सलूणी में शाम चार बजे ताला लटक जाता है। रात में बीमार पड़ने पर मरीजों को मजबूरन 60 किलोमीटर दूर चंबा अस्पताल का सफर तय करना पड़ता है। सरकार ने दिन और रात की ड्यूटी के लिए डॉक्टर तो नियुक्त कर दिए हैं लेकिन नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते रात्रिकालीन सेवाएं दो साल से शुरू नहीं हो पाई हैं।
अस्पताल में रात के लिए एक डॉक्टर की ड्यूटी रहती है लेकिन सहयोगी स्टाफ न होने के कारण कोई इलाज नहीं हो पाता। इंजेक्शन, ड्रेसिंग और इमरजेंसी केस जैसे महत्वपूर्ण उपचार ठप पड़े हैं। रात के समय कोई मरीज या गर्भवती महिला बीमार हो जाए तो उसके परिजन अंधेरी सड़कों से होते हुए 60 किलोमीटर का सफर तय कर चंबा अस्पताल पहुंचते हैं। कई बार गंभीर मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है, कुछ तो चंबा पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
खेम राज, लेख राज, पीयूष कुमार, टेक चंद, अभय सिंह, ओमप्रकाश, प्रेम सिंह चतरो और माधो राम का कहना है कि सलूणी, सिंगाधार, बियाणा, खरोठी, पुखरी, सियूला, लिग्गा क्षेत्र की नौ पंचायतों की करीब 12,000 की आबादी बीते दो साल से इस परेशानी से जूझ रही है। जब अस्पताल के लिए भवन, उपकरण और डॉक्टर सब मौजूद हैं, तो सिर्फ स्टाफ की कमी के कारण रात की सेवाएं क्यों ठप हैं, रात में किसी को पेट दर्द या प्रसव पीड़ा हो जाए तो सलूणी अस्पताल के दरवाजे बंद मिलते हैं। सरकार को हमारी तकलीफ समझनी चाहिए। यह समस्या दो सालों से चल रही है और अब सरकार ने डॉक्टर भेजे लेकिन बिना टीम के, जिससे जनता को कोई लाभ नहीं मिला। अगर किसी दिन कोई बड़ी आपात स्थिति आई तो जिम्मेदारी कौन लेगा। सीएमओ चंबा डॉ. बिपिन ठाकुर ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। इस समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
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अस्पताल में रात के लिए एक डॉक्टर की ड्यूटी रहती है लेकिन सहयोगी स्टाफ न होने के कारण कोई इलाज नहीं हो पाता। इंजेक्शन, ड्रेसिंग और इमरजेंसी केस जैसे महत्वपूर्ण उपचार ठप पड़े हैं। रात के समय कोई मरीज या गर्भवती महिला बीमार हो जाए तो उसके परिजन अंधेरी सड़कों से होते हुए 60 किलोमीटर का सफर तय कर चंबा अस्पताल पहुंचते हैं। कई बार गंभीर मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है, कुछ तो चंबा पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
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खेम राज, लेख राज, पीयूष कुमार, टेक चंद, अभय सिंह, ओमप्रकाश, प्रेम सिंह चतरो और माधो राम का कहना है कि सलूणी, सिंगाधार, बियाणा, खरोठी, पुखरी, सियूला, लिग्गा क्षेत्र की नौ पंचायतों की करीब 12,000 की आबादी बीते दो साल से इस परेशानी से जूझ रही है। जब अस्पताल के लिए भवन, उपकरण और डॉक्टर सब मौजूद हैं, तो सिर्फ स्टाफ की कमी के कारण रात की सेवाएं क्यों ठप हैं, रात में किसी को पेट दर्द या प्रसव पीड़ा हो जाए तो सलूणी अस्पताल के दरवाजे बंद मिलते हैं। सरकार को हमारी तकलीफ समझनी चाहिए। यह समस्या दो सालों से चल रही है और अब सरकार ने डॉक्टर भेजे लेकिन बिना टीम के, जिससे जनता को कोई लाभ नहीं मिला। अगर किसी दिन कोई बड़ी आपात स्थिति आई तो जिम्मेदारी कौन लेगा। सीएमओ चंबा डॉ. बिपिन ठाकुर ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। इस समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
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