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Chamba News: जिसे करना था चार्जशीट, उन वन रक्षक को दो बार दे दी पदोन्नति
Sun, 21 Apr 2024 10:00 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 21 Apr 2024 10:00 PM IST
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चंबा। लॉट के नाम पर पेड़ों की गलत निशानदेही करने के मामले में जिस वन रक्षक को चार्जशीट होना था, उसे वन विभाग ने दो बार पदोन्नति दे दी है।
इस मामले में संलिप्त वन निगम के दो कर्मचारी चार्जशीट किए गए थे। जांच टीम ने भी वन रक्षक के खिलाफ पेड़ों की निशानदेही में लापरवाही बरतने की बात कही है। हैरानी की बात है कि इस मामले को दस साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक वन विभाग वन रक्षक को चार्जशीट नहीं कर पाया है। शिमला से आई टीम, वन निगम और विभाग के अधिकारी भी इस मामले की 2017 और 2019 में भी जांच कर चुके हैं। जांच टीम ने भी आरोपी वनरक्षक को चार्जशीट करने की सिफारिश की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
आरोप है कि विभाग की तरफ से इस मामले को दबाने की भी कोशिश की गई। यह मामला उस समय दोबारा उजागर हो गया, जब आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार ने वन विभाग से इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे। दस्तावेजों के मुताबिक वन रक्षक को चार्जशीट करने के लिए ड्राफ्ट तो बनाया गया, लेकिन उसे चार्जशीट नहीं किया गया। अब आरटीआई कार्यकर्ता ने मामले की प्रगति रिपोर्ट को लेकर पीसीसीएफ शिमला को चिट्ठी लिखी और मामले की पूरी जांच रिपोर्ट उपलब्ध करवाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2014-15 में चुराह वन मंडल की टिकरी रेंज की बघेई बीट में 700 पेड़ों को काटने के लिए लॉट लगा। लॉट जिस ठेकेदार को अवार्ड हुआ, उसने जंगल में जाकर देखा तो लॉट में दर्शाए गए पेड़ वहां मौजूद नहीं थे। जंगल में मात्र 60 से 70 पेड़ों पर ही खुदान हुआ था। ठेकेदार अवैध कटान को लेकर डर गया। उसने लॉट में गलत निशानदेही को लेकर वन निगम के कार्यालय में शिकायत की।
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शिकायत के बाद वन विभाग और वन निगम के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने लॉट का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में पेड़ों की निशानदेही गलत निकली। इसमें वन विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई। वन निगम के कर्मचारियों की भी मिलीभगत दिखी। मामले में वन निगम ने अपने डिप्टी रेंजर और एएम () को चार्जशीट कर दिया, लेकिन वन विभाग के वन रक्षक को इस मामले में आज दिन तक चार्जशीट नहीं किया गया। आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार ने वन विभाग और सरकार से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच की जाए।
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मुख्य वन अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन ने बताया कि इस मामले में चार्जशीट ड्राफ्ट शिमला भेज दिया गया है। अब वहां से जो भी दिशा-निर्देश होंगे, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
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इस मामले में संलिप्त वन निगम के दो कर्मचारी चार्जशीट किए गए थे। जांच टीम ने भी वन रक्षक के खिलाफ पेड़ों की निशानदेही में लापरवाही बरतने की बात कही है। हैरानी की बात है कि इस मामले को दस साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक वन विभाग वन रक्षक को चार्जशीट नहीं कर पाया है। शिमला से आई टीम, वन निगम और विभाग के अधिकारी भी इस मामले की 2017 और 2019 में भी जांच कर चुके हैं। जांच टीम ने भी आरोपी वनरक्षक को चार्जशीट करने की सिफारिश की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
आरोप है कि विभाग की तरफ से इस मामले को दबाने की भी कोशिश की गई। यह मामला उस समय दोबारा उजागर हो गया, जब आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार ने वन विभाग से इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे। दस्तावेजों के मुताबिक वन रक्षक को चार्जशीट करने के लिए ड्राफ्ट तो बनाया गया, लेकिन उसे चार्जशीट नहीं किया गया। अब आरटीआई कार्यकर्ता ने मामले की प्रगति रिपोर्ट को लेकर पीसीसीएफ शिमला को चिट्ठी लिखी और मामले की पूरी जांच रिपोर्ट उपलब्ध करवाने की मांग की है।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2014-15 में चुराह वन मंडल की टिकरी रेंज की बघेई बीट में 700 पेड़ों को काटने के लिए लॉट लगा। लॉट जिस ठेकेदार को अवार्ड हुआ, उसने जंगल में जाकर देखा तो लॉट में दर्शाए गए पेड़ वहां मौजूद नहीं थे। जंगल में मात्र 60 से 70 पेड़ों पर ही खुदान हुआ था। ठेकेदार अवैध कटान को लेकर डर गया। उसने लॉट में गलत निशानदेही को लेकर वन निगम के कार्यालय में शिकायत की।
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शिकायत के बाद वन विभाग और वन निगम के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने लॉट का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में पेड़ों की निशानदेही गलत निकली। इसमें वन विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई। वन निगम के कर्मचारियों की भी मिलीभगत दिखी। मामले में वन निगम ने अपने डिप्टी रेंजर और एएम () को चार्जशीट कर दिया, लेकिन वन विभाग के वन रक्षक को इस मामले में आज दिन तक चार्जशीट नहीं किया गया। आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार ने वन विभाग और सरकार से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच की जाए।
मुख्य वन अरण्यपाल अभिलाष दामोदरन ने बताया कि इस मामले में चार्जशीट ड्राफ्ट शिमला भेज दिया गया है। अब वहां से जो भी दिशा-निर्देश होंगे, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।