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Chamba News: जड़ी-बूटियों से महक रहा रोजगार का कारोबार
Mon, 14 Sep 2026 10:39 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 14 Sep 2026 10:39 PM IST
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प्राकृतिक साबुन, शैंपू, तेल और क्रीम तैयार कर रही महिलाएं, कृत्रिम रंग-खुशबू से दूरी
घर के पास मिला काम, स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं कमा रहीं आय
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। सिल्लाघ्राट गांव की मुमताज और गफूर मुहम्मद ने स्थानीय जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक सामग्री को रोजगार का जरिया बना लिया है। दोनों की पहल से तैयार हो रहे साबुन, शैंपू, तेल और क्रीम जैसे उत्पाद लोगों को पसंद आ रहे हैं।
खास बात यह है कि उत्पादों को तैयार करने में कृत्रिम रंग और खुशबू का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
मुमताज और गफूर मुहम्मद चारकोल, अमरबेल, लैवेंडर, अखरोट, गुलाब, खुमानी, हल्दी, कलौंजी, बिच्छू बूटी, पुदीना और नींबू जैसी प्राकृतिक सामग्री से विभिन्न प्रकार के साबुन तैयार करते हैं। बकरी के दूध, चावल, नीम, एलोवेरा, मुल्तानी मिट्टी और चंदन से भी जैविक साबुन बनाए जा रहे हैं। प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
मुमताज के अनुसार साबुन बनाने के लिए गर्म और ठंडी, दोनों प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। गर्म प्रक्रिया से तैयार साबुन अपेक्षाकृत जल्दी इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है, जबकि ठंडी प्रक्रिया से बने साबुन को पूरी तरह तैयार होने में करीब चार से पांच सप्ताह लगते हैं।
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साबुन के अलावा प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और सामग्री से तेल, शैंपू और क्रीम भी तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल से जुड़ा स्वयं सहायता समूह करीब 20 महिलाओं को रोजगार दे रहा है। महिलाओं को घर के आसपास ही काम मिलने से उन्हें आय का साधन मिला है। स्थानीय संसाधनों से उत्पाद तैयार कर यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार की नई राह भी खोल रही है।
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घर के पास मिला काम, स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं कमा रहीं आय
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। सिल्लाघ्राट गांव की मुमताज और गफूर मुहम्मद ने स्थानीय जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक सामग्री को रोजगार का जरिया बना लिया है। दोनों की पहल से तैयार हो रहे साबुन, शैंपू, तेल और क्रीम जैसे उत्पाद लोगों को पसंद आ रहे हैं।
खास बात यह है कि उत्पादों को तैयार करने में कृत्रिम रंग और खुशबू का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
मुमताज और गफूर मुहम्मद चारकोल, अमरबेल, लैवेंडर, अखरोट, गुलाब, खुमानी, हल्दी, कलौंजी, बिच्छू बूटी, पुदीना और नींबू जैसी प्राकृतिक सामग्री से विभिन्न प्रकार के साबुन तैयार करते हैं। बकरी के दूध, चावल, नीम, एलोवेरा, मुल्तानी मिट्टी और चंदन से भी जैविक साबुन बनाए जा रहे हैं। प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
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मुमताज के अनुसार साबुन बनाने के लिए गर्म और ठंडी, दोनों प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। गर्म प्रक्रिया से तैयार साबुन अपेक्षाकृत जल्दी इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है, जबकि ठंडी प्रक्रिया से बने साबुन को पूरी तरह तैयार होने में करीब चार से पांच सप्ताह लगते हैं।
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साबुन के अलावा प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और सामग्री से तेल, शैंपू और क्रीम भी तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल से जुड़ा स्वयं सहायता समूह करीब 20 महिलाओं को रोजगार दे रहा है। महिलाओं को घर के आसपास ही काम मिलने से उन्हें आय का साधन मिला है। स्थानीय संसाधनों से उत्पाद तैयार कर यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार की नई राह भी खोल रही है।