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टीमें बूस्टर डोज लगाने में व्यस्त, नौनिहालों का स्वास्थ्य रामभरोसे
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चंबा। स्वास्थ्य विभाग भले ही लोगों को बूस्टर डोज लगाकर कोरोना संक्रमण से बचाने की योजनाएं बना रहा हो लेकिन छोटे बच्चों को बीमारी से बचाने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की अनदेखी की जा रही है।
कोविड के दो साल बाद इस कार्यक्रम को जिले में शुरू ही किया गया था कि कुछ माह बाद इसे स्थगित करना पड़ा। इस कार्यक्रम में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को विभाग ने बूस्टर डोज लगाने के अभियान में लगाया है। इससे पिछले कई माह से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की जांच नहीं हो पाई है। इस कार्यक्रम के तहत बीमार बच्चों को मुफ्त इलाज मुहैया करवाने वाले येलो रेफर कार्ड सीएमओ कार्यालय में धूल फांक रहे हैं।
कार्यक्रम के तहत मोबाइल स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती हैं। इसमें यदि कोई बच्चा गंभीर रूप से बीमार पाया जाता है तो उसे येलो रेफर कार्ड दिया जाता है। इस कार्ड पर बच्चे की पूरी बीमारी का इलाज मुफ्त होता है। जिले में 11 मोबाइल हेल्थ टीमें गठित की गई थीं जो रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती थीं लेकिन मौजूदा समय में इन टीमों की ड्यूटी बूस्टर डोज लगाने में लगाई गई है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच अधर में लटक गई है।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में आधा दर्जन ऐसे बच्चों का इलाज हुआ है जो दिल की बीमारी से ग्रसित थे। उनका परिवार बीमारी का इलाज करवाने में असमर्थ था। ऐसे बच्चों का इलाज येलो रेफर कार्ड के जरिये टांडा और आईजीएमसी शिमला में मुफ्त हुआ। इससे बच्चों को नई जिंदगी मिली।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जालम सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अभियान में सेवाएं देने वाले सभी कर्मचारी मौजूदा समय में बूस्टर डोज लगाने में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जल्द ही इस कार्यक्रम को शुरू किया जाएगा।
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कोविड के दो साल बाद इस कार्यक्रम को जिले में शुरू ही किया गया था कि कुछ माह बाद इसे स्थगित करना पड़ा। इस कार्यक्रम में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को विभाग ने बूस्टर डोज लगाने के अभियान में लगाया है। इससे पिछले कई माह से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की जांच नहीं हो पाई है। इस कार्यक्रम के तहत बीमार बच्चों को मुफ्त इलाज मुहैया करवाने वाले येलो रेफर कार्ड सीएमओ कार्यालय में धूल फांक रहे हैं।
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कार्यक्रम के तहत मोबाइल स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती हैं। इसमें यदि कोई बच्चा गंभीर रूप से बीमार पाया जाता है तो उसे येलो रेफर कार्ड दिया जाता है। इस कार्ड पर बच्चे की पूरी बीमारी का इलाज मुफ्त होता है। जिले में 11 मोबाइल हेल्थ टीमें गठित की गई थीं जो रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती थीं लेकिन मौजूदा समय में इन टीमों की ड्यूटी बूस्टर डोज लगाने में लगाई गई है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच अधर में लटक गई है।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में आधा दर्जन ऐसे बच्चों का इलाज हुआ है जो दिल की बीमारी से ग्रसित थे। उनका परिवार बीमारी का इलाज करवाने में असमर्थ था। ऐसे बच्चों का इलाज येलो रेफर कार्ड के जरिये टांडा और आईजीएमसी शिमला में मुफ्त हुआ। इससे बच्चों को नई जिंदगी मिली।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जालम सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अभियान में सेवाएं देने वाले सभी कर्मचारी मौजूदा समय में बूस्टर डोज लगाने में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जल्द ही इस कार्यक्रम को शुरू किया जाएगा।