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बीड़ी, सिगरेट और शराब के सेवन से पुरूष हो रहे टीबी रोग से ग्रसित
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चंबा। बीड़ी, सिगरेट और शराब के सेवन से पुरुष टीबी रोग से ग्रसित हो रहे हैं। जिले में टीबी ग्रसित मरीजों में 59 प्रतिशत पुरुष शामिल हैं। 36 प्रतिशत महिलाएं और 4 प्रतिशत 18 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चे शामिल हैं। पिछले नौ महीनों में टीबी के सात सौ नए मरीज सामने आए हैं। इसमें महिलाओं और बच्चों की तुलना में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। 417 पुरुष, 256 महिलाएं और 27 बच्चे टीबी से ग्रसित हैं, जिनका इलाज स्वास्थ्य विभाग अपनी देखरेख में करवा रहा है। ये मरीज जिले के विभिन्न अस्पतालों और चंबा मेडिकल कॉलेज में टेस्टिंग के दौरान सामने आए। जो पुरुष बीड़ी, सिगरेट और शराब का अधिक सेवन करते हैं, उन्हें टीबी रोग होने का खतरा ज्यादा होता है। अब तक जिले में जो पुरुष टीबी से ग्रसित निकले हैं, उनमें ये आदतें ही टीबी होने का कारण पाई गई हैं।
वहीं, महिलाओं में टीबी होने का कारण खराब खान पान और रहन-सहन माना जा रहा है। इसके अलावा धुएं में ज्यादा काम करने से भी महिलाएं टीबी से ग्रसित हुई हैं। इसके अलावा 18 वर्ष से कम आयु वाले बच्चे अपने टीबी ग्रसित माता-पिता के संपर्क में आने से ग्रसित हुए हैं। कुपोषण के कारण भी बच्चे टीबी का शिकार बन रहे हैं। इसलिए लोगों को अपने बच्चों को टीबी से बचाने के लिए उनके खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इतना ही नहीं, जिन घरों में हवादार कमरे नहीं होते वहां रहने वाले लोगों को भी टीबी होने का खतरा ज्यादा रहता है। लोगों को घरों के कमरों में वेंटिलेटर की व्यवस्था करनी चाहिए।
शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी मरीजों का आंकड़ा ज्यादा है। समोट, पुखरी, किहार, तीसा और चूड़ी में टीबी के मरीज अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा हैं। इन मरीजों को स्वास्थ्य विभाग पोषण सहायता के रूप में 500 रुपये प्रतिमाह दे रहा है। इसके अलावा उनके इलाज के लिए मुफ्त दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर हरित पुरी ने बताया कि बीड़ी, सिगरेट और शराब के अधिक सेवन से ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष टीबी से ग्रसित हो रहे हैं। लोगों को इस बीमारी से बचने के लिए अपने खानपान और रहन-सहन में एहतियात बरतने की आवश्यकता है।
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वहीं, महिलाओं में टीबी होने का कारण खराब खान पान और रहन-सहन माना जा रहा है। इसके अलावा धुएं में ज्यादा काम करने से भी महिलाएं टीबी से ग्रसित हुई हैं। इसके अलावा 18 वर्ष से कम आयु वाले बच्चे अपने टीबी ग्रसित माता-पिता के संपर्क में आने से ग्रसित हुए हैं। कुपोषण के कारण भी बच्चे टीबी का शिकार बन रहे हैं। इसलिए लोगों को अपने बच्चों को टीबी से बचाने के लिए उनके खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इतना ही नहीं, जिन घरों में हवादार कमरे नहीं होते वहां रहने वाले लोगों को भी टीबी होने का खतरा ज्यादा रहता है। लोगों को घरों के कमरों में वेंटिलेटर की व्यवस्था करनी चाहिए।
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शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी मरीजों का आंकड़ा ज्यादा है। समोट, पुखरी, किहार, तीसा और चूड़ी में टीबी के मरीज अन्य क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा हैं। इन मरीजों को स्वास्थ्य विभाग पोषण सहायता के रूप में 500 रुपये प्रतिमाह दे रहा है। इसके अलावा उनके इलाज के लिए मुफ्त दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर हरित पुरी ने बताया कि बीड़ी, सिगरेट और शराब के अधिक सेवन से ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष टीबी से ग्रसित हो रहे हैं। लोगों को इस बीमारी से बचने के लिए अपने खानपान और रहन-सहन में एहतियात बरतने की आवश्यकता है।