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बर्फबारी से सेब की 50 फीसदी फसल तबाह
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पांगी में बर्फ टूटे सेब के पेड़।
- फोटो : Chamba
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पांगी (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र पांगी के बागवानों ने दावा किया है कि बर्फबारी से उनकी सेब की 50 फीसदी फसल तबाह हो गई है। फसल बेचकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले बागवानों की मेहनत पर बर्फबारी ने पानी फेर दिया है। हिमपात से बगीचों में ही सेब के पेड़ उखड़ गए हैं। बागवानों ने पांगी प्रशासन और उद्यान विभाग से नुकसान का आकलन कर प्रभावितों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
गौरतलब है कि पांगी के धरवास, कुठल, साच, कुफा, कबास, लुंज सहित आसपास की भुटोरियों को छोड़ शेष समूचे क्षेत्र में पांगीवासी सेब की पैदावार कर अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। लेकिन, इस वर्ष अक्तूबर के अंतिम सप्ताह हुई बारिश ने बागवानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। मूसलाधार बारिश और बर्फबारी से बागवानों के बागीचों में सेब की खड़ी फसल पेड़ों सहित तहस-नहस हो गई, जिससे बागवानों को लाखों की चपत लगी है।
बागवानों बृजलाल, भगतराम, प्रेम लाल, मनसा राम, राम कुमार, हरीश कुमार, केवल कृष्ण, रामदयाल और अशोक ने कहा कि पांगी की करीब 95 प्रतिशत आबादी सेब की पैदावार करती है। यहां पर तैयार होने वाली फसल को बागवान चंडीगढ़ और जालंधर बेचने के लिए जाते हैं। नवंबर में फसल का तुड़ान किया जाता है। वहीं, कई व्यापारी बागीचों में खड़ी फसल को ही खरीद लेते हैं लेकिन, इस बार मौसम की मार ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
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एसडीएम पांगी रजनीश कुमार ने कहा कि बर्फबारी से बागवानों को हुए नुकसान का आकलन तैयार करवाने के लिए फील्ड स्टाफ को निर्देश जारी कर दिए हैं। कहा कि एक-दो दिन में रिपोर्ट उनके पास पहुंच जाएगी।
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गौरतलब है कि पांगी के धरवास, कुठल, साच, कुफा, कबास, लुंज सहित आसपास की भुटोरियों को छोड़ शेष समूचे क्षेत्र में पांगीवासी सेब की पैदावार कर अपने परिवारों का पालन-पोषण करते हैं। लेकिन, इस वर्ष अक्तूबर के अंतिम सप्ताह हुई बारिश ने बागवानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। मूसलाधार बारिश और बर्फबारी से बागवानों के बागीचों में सेब की खड़ी फसल पेड़ों सहित तहस-नहस हो गई, जिससे बागवानों को लाखों की चपत लगी है।
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बागवानों बृजलाल, भगतराम, प्रेम लाल, मनसा राम, राम कुमार, हरीश कुमार, केवल कृष्ण, रामदयाल और अशोक ने कहा कि पांगी की करीब 95 प्रतिशत आबादी सेब की पैदावार करती है। यहां पर तैयार होने वाली फसल को बागवान चंडीगढ़ और जालंधर बेचने के लिए जाते हैं। नवंबर में फसल का तुड़ान किया जाता है। वहीं, कई व्यापारी बागीचों में खड़ी फसल को ही खरीद लेते हैं लेकिन, इस बार मौसम की मार ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है।
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एसडीएम पांगी रजनीश कुमार ने कहा कि बर्फबारी से बागवानों को हुए नुकसान का आकलन तैयार करवाने के लिए फील्ड स्टाफ को निर्देश जारी कर दिए हैं। कहा कि एक-दो दिन में रिपोर्ट उनके पास पहुंच जाएगी।