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Chamba News: वैज्ञानिक पकड़ेंगे मिट्टी की नब्ज... होगी बंपर पैदावार
Thu, 05 Feb 2026 10:33 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 05 Feb 2026 10:33 PM IST
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चंबा। फसल की घटती पैदावार, ऊंची लागत और उर्वरकों की अधिकता से बंजर होती जमीन की समस्या से जूझ रहे चंबा जिले के किसानों के लिए कृषि विभाग ने मिट्टी जांच का अभियान चलाया है। गांव-गांव जाकर टीमें जांच में जुट गईं। अब तक 300 खेतों से सैंपल भी लिए जा चुके हैं। रिपोर्ट के आधार पर कृषि वैज्ञानिक किसानों को बताएंगे कि जमीन में कौन-से पोषक तत्वों की कमी है, किस फसल के लिए मिट्टी उपयुक्त है। कितनी मात्रा में खाद का प्रयोग करने से बंपर पैदावार होगी।
इस अभियान के तहत उपमंडल स्तर पर विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो गांव-गांव जाकर खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र कर रही हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार मिट्टी के इन नमूनों की प्रयोगशाला में जांच भी शुरू हो चुकी है और मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। इस आकलन के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे जाएंगे और उसकी हिसाब से खेतीबाड़ी करने की सलाह हर किसान को दी जाएगी।
इस संबंध में कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बिना मिट्टी जांच के अत्यधिक या असंतुलित खाद के प्रयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है बल्कि खेती की लागत भी बढ़ जाती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने की सलाह दी जाएगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और लागत में कमी आएगी।
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उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें और मिट्टी जांच कराकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। वर्तमान में सलूणी, चुराह, मैहला, भटियात और भरमौर क्षेत्रों में टीमें मिट्टी जांच का कार्य कर रही हैं।
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इस अभियान के तहत उपमंडल स्तर पर विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो गांव-गांव जाकर खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र कर रही हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार मिट्टी के इन नमूनों की प्रयोगशाला में जांच भी शुरू हो चुकी है और मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। इस आकलन के बाद मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे जाएंगे और उसकी हिसाब से खेतीबाड़ी करने की सलाह हर किसान को दी जाएगी।
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इस संबंध में कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि बिना मिट्टी जांच के अत्यधिक या असंतुलित खाद के प्रयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है बल्कि खेती की लागत भी बढ़ जाती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने की सलाह दी जाएगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और लागत में कमी आएगी।
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उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें और मिट्टी जांच कराकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। वर्तमान में सलूणी, चुराह, मैहला, भटियात और भरमौर क्षेत्रों में टीमें मिट्टी जांच का कार्य कर रही हैं।