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Chamba News: मक्कन-चचूल के लिए 19 सालों में नहीं बनी सड़क
Mon, 27 May 2024 11:45 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 27 May 2024 11:45 PM IST
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तीसा (चंबा)। चुराह उपमंडल की सनवाल पंचायत के मक्कन-चचूल गांव की दो हजार आबादी को आज तक सड़क नहीं मिली है।
सनवाल से मक्कन-चचूल के लिए चार किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए वर्ष 1994 में स्वीकृति जरूर मिली थी, लेकिन आज तक इसका काम शुरू नहीं हुआ है। इसका खामियाजा बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। मक्कन-चचूल के साथ जम्मू-कश्मीर का सीमांत क्षेत्र भी हैं। सड़क न होने से सनवाल से ग्रामीणों को रोजमर्रा का सामान खच्चर मालिकों को 300 रुपये देकर घर पहुंचाना पड़ता है। इससे ग्रामीण नाराज हैं। उन्होंने कहा कि कई बार शासन-प्रशासन से भी मांग उठाई गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब ग्रामीणों को एक जून को मतदान न करने का निर्णय लिया है।
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1994 में मक्कन-चचलू के लिए सनवाल से सड़क निर्माण की स्वीकृति मिली है। अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। बुजुर्ग सरकार से सड़क की मांग करते-करते स्वर्ग सिधार चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं हो पाई है। - जन्म सिंह
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गांवों में कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे पीठ पर या पालकी में सनवाल पहुंचाना पड़ता है। यहां से आगे वाहन के जरिये ही मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है। कई बार मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ देते हैं। - नरेन सिंह
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सनवाल पंचायत के चचूल और मक्कन में ग्रामीणों को सामान पीठ पर या खच्चरों के जरिये ही घरों तक पहुंचाना पड़ता है। सड़क न होने से क्षेत्र विकास की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाया है। सरकार इस ओर ध्यान दे। - देवराज
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गृह निर्माण सामग्री खरीदने के बाद इसे घर तक पहुंचाना महंगा पड़ता है। सरकार गरीब परिवारों को मकान बनाने के लिए डेढ़ लाख देती है, लेकिन सामान घर तक पहुंचाने में अधिक पैसा खर्च हो जाता है। - प्रेमलाल
-- लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा ने बताया कि गांवों के लिए सड़क स्वीकृत होने के बाद वन विभाग से भी अनुमति हासिल कर ली गई है। ग्रामीण जमीन विभाग के नाम नहीं कर रहे हैं। ग्रामीण विभाग के नाम जमीन करवाएं तो विभाग सड़क बनाने को लेकर आगामी प्रयास शुरू करेगा।
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सनवाल से मक्कन-चचूल के लिए चार किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए वर्ष 1994 में स्वीकृति जरूर मिली थी, लेकिन आज तक इसका काम शुरू नहीं हुआ है। इसका खामियाजा बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। मक्कन-चचूल के साथ जम्मू-कश्मीर का सीमांत क्षेत्र भी हैं। सड़क न होने से सनवाल से ग्रामीणों को रोजमर्रा का सामान खच्चर मालिकों को 300 रुपये देकर घर पहुंचाना पड़ता है। इससे ग्रामीण नाराज हैं। उन्होंने कहा कि कई बार शासन-प्रशासन से भी मांग उठाई गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब ग्रामीणों को एक जून को मतदान न करने का निर्णय लिया है।
1994 में मक्कन-चचलू के लिए सनवाल से सड़क निर्माण की स्वीकृति मिली है। अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। बुजुर्ग सरकार से सड़क की मांग करते-करते स्वर्ग सिधार चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं हो पाई है। - जन्म सिंह
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गांवों में कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे पीठ पर या पालकी में सनवाल पहुंचाना पड़ता है। यहां से आगे वाहन के जरिये ही मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है। कई बार मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ देते हैं। - नरेन सिंह
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सनवाल पंचायत के चचूल और मक्कन में ग्रामीणों को सामान पीठ पर या खच्चरों के जरिये ही घरों तक पहुंचाना पड़ता है। सड़क न होने से क्षेत्र विकास की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाया है। सरकार इस ओर ध्यान दे। - देवराज
गृह निर्माण सामग्री खरीदने के बाद इसे घर तक पहुंचाना महंगा पड़ता है। सरकार गरीब परिवारों को मकान बनाने के लिए डेढ़ लाख देती है, लेकिन सामान घर तक पहुंचाने में अधिक पैसा खर्च हो जाता है। - प्रेमलाल