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रेबीज संक्रमित पशु की लार से फैलता है रेबीज रोग : डॉ. कविता
Wed, 30 Sep 2026 04:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 30 Sep 2026 04:13 AM IST
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चंबा। रेबीज संक्रमित कुत्ते या पशु की लार से फैलने वाला गंभीर वायरल रोग है। संक्रमित कुत्ते या पशु के काटने या खरोंचने पर वायरस शरीर में प्रवेश कर सकता है।
यह बात विश्व रेबीज दिवस के उपलक्ष्य में शंकुलता नर्सिंग कॉलेज सरोल में आयोजित कार्यक्रम में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कविता महाजन ने कही। उन्हाेंने कहा कि रेबीज संक्रमित पशु के काटने पर झोलाछाप या पारंपरिक उपचार पर निर्भर न रहें।
घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोकर शीघ्र स्वास्थ्य संस्थान में चिकित्सकीय सलाह लें और आवश्यक एंटी रेबीज वैक्सीन और अन्य निर्धारित उपचार करवाएं।
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उन्होंने कहा कि लापरवाही की स्थिति में रेबीज वायरस तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इससे बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, उत्तेजना और पक्षाघात जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं। बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से भाषण प्रतियोगिता करवाई गई और विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि विश्व रेबीज दिवस हर वर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस फ्रांसीसी सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक लुई पाश्चर की पुण्यतिथि पर मनाया जाता है, जिन्होंने रेबीज के खिलाफ पहला टीका विकसित किया था।
वर्ष 2007 से इसका उद्देश्य रेबीज की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बीमारी के उन्मूलन के प्रयासों को उजागर करना है। उन्होंने पालतू पशुओं का समय पर पंजीकरण और नियमित टीकाकरण करवाने की अपील की।
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यह बात विश्व रेबीज दिवस के उपलक्ष्य में शंकुलता नर्सिंग कॉलेज सरोल में आयोजित कार्यक्रम में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कविता महाजन ने कही। उन्हाेंने कहा कि रेबीज संक्रमित पशु के काटने पर झोलाछाप या पारंपरिक उपचार पर निर्भर न रहें।
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घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोकर शीघ्र स्वास्थ्य संस्थान में चिकित्सकीय सलाह लें और आवश्यक एंटी रेबीज वैक्सीन और अन्य निर्धारित उपचार करवाएं।
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उन्होंने कहा कि लापरवाही की स्थिति में रेबीज वायरस तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। इससे बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन, उत्तेजना और पक्षाघात जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं। बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से भाषण प्रतियोगिता करवाई गई और विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम भारद्वाज ने बताया कि विश्व रेबीज दिवस हर वर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस फ्रांसीसी सूक्ष्मजीव वैज्ञानिक लुई पाश्चर की पुण्यतिथि पर मनाया जाता है, जिन्होंने रेबीज के खिलाफ पहला टीका विकसित किया था।
वर्ष 2007 से इसका उद्देश्य रेबीज की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना और बीमारी के उन्मूलन के प्रयासों को उजागर करना है। उन्होंने पालतू पशुओं का समय पर पंजीकरण और नियमित टीकाकरण करवाने की अपील की।