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Chamba News: ओपीडी के बाहर लगीं कतारें, थक गए तो ठंडे फर्श पर बैठ गए मरीज
Mon, 04 Dec 2023 10:42 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 04 Dec 2023 10:42 PM IST
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चंबा मेडिकल कॉलेज की मेडिसन ओपीडी के बाहर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते लोग।संवाद
चंबा। दिन : सोमवार, स्थान : चंबा मेडिकल कॉलेज, ओपीडी के बाहर लाइन में खड़े होकर मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मेडिसन ओपीडी के बाहर मरीजों की सबसे ज्यादा भीड़ है।
एक एक महिलाएं कतार में खड़ी हैं तो दूसरी ओर पुरुष मरीज कतार में खड़े हैं। ओपीडी में मरीजों की जांच के लिए एक ही मेडिसन विशेषज्ञ बैठा है। इस वजह से मरीजों को जांच करवाने में देरी हो रही है। ज्यादा देर तक लाइन में खड़ा नहीं रह पाने के कारण कुछ मरीज ठंडे फर्श पर बैठे हैं। विशेषज्ञ को एक मरीज को देखने में 10 मिनट का समय लग रहा है। इससे कतारों में खड़े मरीजों को स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए काफी देर लग रही है। मरीज सुबह 9:00 बजे पर्ची बनाकर ओपीडी के बाहर खड़े हो गए थे। 10:00 बजे ओपीडी में विशेषज्ञ के आते ही मरीज कतारों में खड़े हो गए। लाइनें शाम तक लगी रहीं। दोपहर 12:00 बजे जब दूसरा विशेषज्ञ ओपीडी में पहुंचा। इसके बाद मरीजों की जांच में तेजी आई।
उधर, मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में दो विशेषज्ञ ड्यूटी पर होते हैं। वार्ड में राउंड करने के कारण दूसरे विशेषज्ञ को आने में देरी हुई। हालांकि, शाम होने तक सभी मरीजों की स्वास्थ्य जांच कर दी गई।
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मेडिकल कॉलेज में मेडिसन ओपीडी में मरीजों की सबसे अधिक भीड़ रहती है। इसलिए ओपीडी में कम से कम तीन विशेषज्ञ होने चाहिए। इससे मरीजों को स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक विशेषज्ञ ओपीडी में होने से मरीजों को काफी परेशानी होती है। - सीता देवी, निवासी कोहाल
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मेडिसन और महिला ओपीडी सुबह से शाम तक मरीजों से भरी रहती है। इन ओपीडी में सुबह 9:00 बजे विशेषज्ञ बैठ जाने चाहिए। दूरदराज क्षेत्रों के मरीज तड़के ही घर से मेडिकल कॉलेज पहुंच जाते हैं, लेकिन उन्हें चिकित्सक के ओपीडी में आने तक इंतजार करना पड़ता है। - आजाद हुसैन, निवासी चंबा
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मेडिकल कॉलेज में जिले के हर क्षेत्र से मरीज इलाज करवाने आते हैं। यदि ओपीडी में एक डॉक्टर होगा तो इन मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाएगा। इसलिए मरीजों की सुविधा काे ध्यान में रखते हुए हर ओपीडी में दो से तीन विशेषज्ञ होने चाहिए। - महेशो देवी, निवासी खज्जियार
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मेडिकल कॉलेज जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान है। इसलिए यहां चलने वाली ओपीडी में छोटे स्वास्थ्य संस्थानों की ओपीडी की तुलना में अधिक डॉक्टर होने चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर ओर जल्दी उपचार मिल सके। - अमर सिंह, निवासी भलेई
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एक एक महिलाएं कतार में खड़ी हैं तो दूसरी ओर पुरुष मरीज कतार में खड़े हैं। ओपीडी में मरीजों की जांच के लिए एक ही मेडिसन विशेषज्ञ बैठा है। इस वजह से मरीजों को जांच करवाने में देरी हो रही है। ज्यादा देर तक लाइन में खड़ा नहीं रह पाने के कारण कुछ मरीज ठंडे फर्श पर बैठे हैं। विशेषज्ञ को एक मरीज को देखने में 10 मिनट का समय लग रहा है। इससे कतारों में खड़े मरीजों को स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए काफी देर लग रही है। मरीज सुबह 9:00 बजे पर्ची बनाकर ओपीडी के बाहर खड़े हो गए थे। 10:00 बजे ओपीडी में विशेषज्ञ के आते ही मरीज कतारों में खड़े हो गए। लाइनें शाम तक लगी रहीं। दोपहर 12:00 बजे जब दूसरा विशेषज्ञ ओपीडी में पहुंचा। इसके बाद मरीजों की जांच में तेजी आई।
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उधर, मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में दो विशेषज्ञ ड्यूटी पर होते हैं। वार्ड में राउंड करने के कारण दूसरे विशेषज्ञ को आने में देरी हुई। हालांकि, शाम होने तक सभी मरीजों की स्वास्थ्य जांच कर दी गई।
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मेडिकल कॉलेज में मेडिसन ओपीडी में मरीजों की सबसे अधिक भीड़ रहती है। इसलिए ओपीडी में कम से कम तीन विशेषज्ञ होने चाहिए। इससे मरीजों को स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक विशेषज्ञ ओपीडी में होने से मरीजों को काफी परेशानी होती है। - सीता देवी, निवासी कोहाल
मेडिसन और महिला ओपीडी सुबह से शाम तक मरीजों से भरी रहती है। इन ओपीडी में सुबह 9:00 बजे विशेषज्ञ बैठ जाने चाहिए। दूरदराज क्षेत्रों के मरीज तड़के ही घर से मेडिकल कॉलेज पहुंच जाते हैं, लेकिन उन्हें चिकित्सक के ओपीडी में आने तक इंतजार करना पड़ता है। - आजाद हुसैन, निवासी चंबा
मेडिकल कॉलेज में जिले के हर क्षेत्र से मरीज इलाज करवाने आते हैं। यदि ओपीडी में एक डॉक्टर होगा तो इन मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाएगा। इसलिए मरीजों की सुविधा काे ध्यान में रखते हुए हर ओपीडी में दो से तीन विशेषज्ञ होने चाहिए। - महेशो देवी, निवासी खज्जियार
मेडिकल कॉलेज जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान है। इसलिए यहां चलने वाली ओपीडी में छोटे स्वास्थ्य संस्थानों की ओपीडी की तुलना में अधिक डॉक्टर होने चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर ओर जल्दी उपचार मिल सके। - अमर सिंह, निवासी भलेई